
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़): वरिष्ठ एडवोकेट विनोद शर्मा ने कहा है कि कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता ही नागरिकों की गरिमा, स्वतंत्रता और सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है। वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी के अभाव में आम नागरिक अक्सर अन्याय, शोषण और उत्पीड़न का शिकार हो जाते हैं।

एडवोकेट विनोद शर्मा ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, लेकिन यदि लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी ही न हो तो ये अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित रह जाते हैं। “कानूनी जागरूकता ही न्याय की पहली सीढ़ी है,” उन्होंने कहा।
वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार से विशेष बातचीत
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को बिना विधिसम्मत प्रक्रिया के गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है और उसे वकील से परामर्श करने का पूरा अधिकार है। साथ ही, किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना कानूनन जरूरी है।
महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए अधिवक्ता शर्मा ने कहा कि घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के विरुद्ध सख्त कानून बनाए गए हैं। समाज और परिवार का दायित्व है कि महिलाएं और बुजुर्ग अपने कानूनी अधिकारों से अवगत हों ताकि वे बिना भय के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा सकें।
मुफ्त कानूनी सहायता के विषय में उन्होंने बताया कि गरीबों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के माध्यम से निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध है। “न्याय धन पर नहीं, अधिकार पर आधारित होना चाहिए,” उन्होंने कहा।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार ने कहा कि कानूनी साक्षरता फैलाना मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी है, क्योंकि जागरूक नागरिक ही लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
अंत में अधिवक्ता विनोद शर्मा ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने मूल कानूनी अधिकारों के प्रति सजग रहें, आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सलाह लें और भय या अज्ञानता के कारण कभी भी अन्याय को सहन न करें। “जिस समाज में नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं, वहां अन्याय अधिक समय तक टिक नहीं सकता,” उन्होंने कहा।











