
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़), नीरज धीमान। पंजाब में 3 से 18 साल के ऐसे बच्चों को वापस शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। समग्र शिक्षा अभियान अथॉरिटी ने राज्य में चल रहे ‘आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रन’ (OoSC) सर्वे को जनवरी 2026 तक पूरा करने को कहा है। यह निर्णय जिलों से प्राप्त रिपोर्ट की समीक्षा के बाद लिया गया है, जिसमें पाया गया कि अभी भी कई क्षेत्रों में बच्चों की पहचान किया जाना बाकी है।

इन जगहों पर विशेष ध्यान देगी टीमें
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सर्वे के दौरान केवल रिहायशी इलाकों तक ही सीमित न रहा जाए। बाल अधिकार रक्षा आयोग और शिक्षा मंत्रालय की हिदायतों के अनुसार, सर्वेक्षण टीमें अब इन स्थानों पर विशेष ध्यान देंगी:
- ईंटों के भट्ठे, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड।
- ट्रैफिक सिग्नल, सड़कों पर रहने वाले और कूड़ा बीनने वाले बच्चे।
- ढाबों, गैरेज और घरों में काम करने वाले बच्चे।
- निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों और प्रवासी परिवारों के बच्चे।
- फ्लाईओवर के नीचे या झुग्गियों में रहने वाले बच्चे।
रिपोर्टिंग में ढिलाई पर सख्ती- विभाग ने पाया है कि स्कूल विजिट के दौरान कई क्षेत्रों को सर्वेक्षण के दायरे में कवर नहीं किया गया था। इसके समाधान के लिए अब जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ वर्चुअल मोड के जरिए रिव्यू मीटिंग की जाएगी। सभी जिलों को हिदायत दी गई है कि वे पहचान किए गए बच्चों का डेटा गूगल शीट पर अपडेट करें।
NGO और विभाग मिलकर करेंगे काम- जिला नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला शिक्षा अधिकारियों, स्कूल प्रमुखों, एसएमसी सदस्यों और बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले NGO के साथ तालमेल बिठाकर काम करें। सर्वेक्षण के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (प्राइमरी) द्वारा सत्यापित सर्टिफिकेट और कंसोलिडेटेड रिपोर्ट मुख्य कार्यालय को भेजी जाएगी। शिक्षा विभाग का लक्ष्य वार्षिक योजना 2026-27 के तहत राज्य के हर बच्चे को स्कूल की दहलीज तक पहुंचाना है।











