
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। श्री राम चरित मानस प्रचार मंडल के स्वर्णिंम जयंती के मौके पर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर प्रकाशानंद जी सरस्वती महाराज के आशीर्वाद एवं सानिध्य में करवाए जा रहे श्री राम नवमीं महोत्सव के तीसरे दिन कथा करते हुए देवी भक्तिप्रभा ने श्री राम कथा में भगवान शंकर व माता पार्वती के विवाह की कथा सुनाकर उपस्थिति को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बहुत ही सुन्दर ढंग से विवाह कथा का वर्णन किया और बताया कि उनका विवाह श्रद्धा और विश्वास का पाणिग्रहण है। इसी प्रकार जब तक श्रद्धा और विश्वास का पाणिग्रहण नहीं होता तब तक राम जी का जन्म व उनकी कथा का जन्म नहीं होगा। उन्होंने बड़े ही सुन्दर ढंग से शंकर जी को दुल्हा के रुप में तैयार करने से लेकर उनके बारात लेकर माता पार्वती जी के घर पहुंचने तक की कथा सुनाई और बताया कि किस प्रकार बारात को देखकर सभी नगर निवासी अपने-अपने घरों को भागने लगते हैं तथा भगवान शंकर का रुप देखकर सभी बड़े बुजुर्ग व बच्चे भी डरने लगते हैं। इस पर भगवान विष्णु द्वारा आग्रह करने पर भगवान शंकर अपना सुन्दर बालक का रुप बनाते हैं तो सभी नगर निवासी उन्हें देखते ही रह जाते हैं। उन्होंने भजनों के माध्यम से कथा में और भी रस भर दिया।

इस अवसर पर आशीर्वाद देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज ने कहा कि हमारे भारत वर्ष में दो विवाहों की पद्दतियां है। एक है स्वयंवर जो राजा, महाराजाओं के समय में व्यवस्था थी तथा दूसरा जैसे परिवार वाले लड़का लड़की को एक दूसरे के लिए पसंद कर लेते हैं। भगवान शंकर का विवाह माता पार्वती जी द्वारा पसंद किए जाने यानि कि स्वयंवर पद्दति से हुआ। भगवान शंकर और माता पार्वती जी एक दूसरे के अर्धांग हैं। भगवान शंकर भगवान राम के अतयंत प्रिय हैं और शंकर जी भी भगवान राम के परम भक्त हैं। माता पार्वती जी शंकर जी से कहती हैं हे प्रभु जिनकी भक्ति आप करते हैं उसमें हमारा भी हिस्सा डालो। तो भगवान शंकर ने उन्हें एक मात्र धर्म श्रेय दिया तथा उन्हें अपनी अर्धांगनि बनाया। यानिकि उन्होंने अपना आधा शरीर नव व आधा नारी के रुप में बनाया। भागवत जी और राम चरित मानस में जो कथाएं आती हैं, सकंद पुराण में व शिव पुराण में जितनी भी कथाएं आती है, उनमें बताया गया है कि भगवान शंकर से बड़ा दयालु व कृपालु देव दूसरा कोई नहीं है। और उनके आराध्य देव भगवान राम हैं तो उनकी कथा से वह और भी प्रसंन हो जाते हैं। स्वामी जी ने कहा कि श्री राम चरित मानस प्रचार मंडल भगवान शिव के आराध्य देव भगवान राम की स्तुति बहुत ही श्रद्धा और भाव से करता है तथा इनके द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य प्रेरणादायक हैं। मंडल के समस्त सदस्य हरीश सैनी की अगुवाई में जो कार्य कर रहे हैं उसमें सभी को अपना योगदान डालना चाहिए ताकि सेवा कार्यों को और बढ़ाया जा सके। आपती उपरांत प्रसाद रुपी भंडारा लगाया गया।
इस मौके पर चेयरमैन संदीप सैनी, अश्वनी शर्मा छोटा, कृष्ण गोपाल आनंद, पवन शर्मा, लक्ष्मी नारायण, नरेन्द्र ठाकुर, आशु शर्मा, जतिंदर शर्मा, नरोत्तम शर्मा, रमन खन्ना, तरुण कैंथ, महेश कुमार मोनू, साहिल, राज कुमार सैनी, राजेश वर्मा, शांति स्वरुप सूद, विपन गुप्ता, डा. सलेश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया।












