Tuesday, October 13, 2026
Home Hoshiarpur शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन के साथ बेटियों की सुरक्षा का संकल्प...

शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन के साथ बेटियों की सुरक्षा का संकल्प भी जरूरी: संजीव अरोड़ा

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। शारदीय नवरात्र के पावन पर्व की शुरुआत के साथ ही देशभर में मां दुर्गा की आराधना और कन्या पूजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारतीय संस्कृति में कन्याओं को मां लक्ष्मी और देवी शक्ति का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। लेकिन यह भी एक चिंताजनक विडंबना है कि एक ओर समाज कन्या पूजन कर बेटियों को सम्मान देने की परंपरा निभाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ असामाजिक तत्व बेटियों और महिलाओं के प्रति घिनौने अपराध करने से भी पीछे नहीं हटते। इस गंभीर विषय पर भारत विकास परिषद की ओर से अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा के नेतृत्व में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी तथा अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया।

Advertisements

इस अवसर पर संजीव अरोड़ा ने कहा कि कन्या पूजन तभी सार्थक है, जब हम अपने जीवन में भी बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार दें। नवरात्र में कन्याओं के चरण पूजना हमारी आस्था का प्रतीक है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा सामाजिक और नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि बेटियों को देवी मानने की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह सोच हमारे व्यवहार, परिवार और समाज में भी दिखाई देनी चाहिए। श्री अरोड़ा ने कहा कि महिलाओं और मासूम बच्चियों के साथ अपराध करने वाले लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और ऐसे अपराध करने वालों को स्पष्ट संदेश जाए कि समाज में इस तरह की घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधों की रोकथाम के लिए परिवारों, शिक्षण संस्थानों, प्रशासन और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा।

बैठक में सचिव रजिंद्र मोदगिल ने कहा, “नवरात्र में हम मां दुर्गा की शक्ति की आराधना करते हैं। यदि हम वास्तव में नारी शक्ति का सम्मान करना चाहते हैं, तो हमें प्रत्येक बेटी को सुरक्षित वातावरण देना होगा। किसी भी बच्ची के साथ होने वाला अपराध केवल उसके परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।”

इस अवसर पर विजय अरोड़ा ने कहा  कि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार, महिलाओं के प्रति सम्मान और सही-गलत की पहचान सिखाई जानी चाहिए। परिवारों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को यह समझाएं कि किसी भी व्यक्ति की गरिमा, इच्छा और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना आवश्यक है। समाज में जागरूकता और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देकर ऐसी घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।

इस अवसर पर लोकेश खन्ना ने कहा कि  महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध अपराधों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पीड़ितों को न्याय दिलाने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक सहयोग और सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। अपराधियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना और ऐसा माहौल बनाना, जिसमें हर बेटी बिना भय के शिक्षा प्राप्त कर सके तथा अपने जीवन में आगे बढ़ सके, पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अंत में संजीव अरोड़ा ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे शारदीय नवरात्र के अवसर पर केवल कन्या पूजन तक ही सीमित न रहें, बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प भी लें। उन्होंने कहा कि एक सभ्य और संस्कारित समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां बेटियां कितनी सुरक्षित, सम्मानित और स्वतंत्र महसूस करती हैं। इस अवसर पर विजय अरोड़ा, दविंद्र अरोड़ा,रजिंद्र मोदगिल, दीपक नरूला, लोकेश खन्ना, अश्वनी कुमार दत्ता, राज कुमार मलिक, जगदीश अग्रवाल, एन. के. गुप्ता, नवीन कोहली व अन्य उपस्थित थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here