
लखनऊ (द स्टैलर न्यूज़)। लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी कैंपस में बनी 6 मजारों को यूनिवर्सिटी की जांच समिति द्वारा लावारिस घोषित कर दिया है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि बार-बार नोटिस देने और सुनवाई का अवसर दिए जाने के बावजूद किसी भी मजार का वैध संचालक या अधिकृत समिति सामने नहीं आई। जांच में यह भी पाया गया कि ये सारी की सारी मजारें अतिक्रमण कर बनाई गई हैं और इनके कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों के आने-जाने में बाधा उत्पन्न होती है। यह जांच अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुई रेप और हत्या की घटना के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे।

इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में KGMU परिसर का व्यापक निरीक्षण किया गया, ताकि परिसर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। इसके बाद परिसर में ऐसी मजारों की पहचान शुरू की गई। निरीक्षण के दौरान कुल 8 मजारों की पहचान की गई, जिनमें ‘शाहमीना साहब की दरगाह’ और ‘हरमैन साहब की मजार’ सहित 6 अन्य मजारें शामिल हैं। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि पहला नोटिस 22 जनवरी 2025 को जारी किया गया था। दूसरा नोटिस 9 फरवरी और तीसरा नोटिस 4 अप्रैल को जारी किया गया था। तय तिथि पर मजार के जिम्मेदार नहीं आए, जबकि केजीएमयू द्वारा नामित अधिकारी मौजूद रहे। केजीएमयू परिसर में शाहमीना साहब की दरगाह और हरमैन शाहब की मजार के अलावा 6 अन्य मजारें पाई गई थीं। इन मजारों में लगी ईंट, टाइल्स एवं निर्माण सामग्री के आधार पर यह साफ होता है कि इनका निर्माण पिछले कई सालों के भीतर किया गया है। ये मजारें मरीजों के आवागमन मार्ग में पड़ती हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता अभिजित मिश्रा ने पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि KGMU परिसर में सरकारी जमीन पर अवैध मजारें और एक मस्जिद जैसी संरचनाएं बनी हुई हैं, जिससे संस्थान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि KGMU एक प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां बड़ी संख्या में मरीज, छात्र और डॉक्टर आते हैं, ऐसे में अवैध ढांचों की मौजूदगी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुरक्षा के लिए बाधा बन रही है।










