
नई दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंची विवादित पुस्तकों को लेकर जम्मू-कश्मीर में कार्रवाई लगातार चल रही है। जम्मू स्थित विवादित पुस्तक के प्रकाशक के कार्यालय पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान पुस्तक के प्रकाशन, संपादन, वितरण और खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद उन 2 पुस्तकों को लेकर सामने आया है, जिनमें कथित तौर पर अलगाववादी नेताओं और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों को ‘महान हस्तियों’ और ‘दिग्गजों’ के रूप में प्रस्तुत किया गया। आरोप है कि पुस्तकों में सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम और मीरवाइज उमर फारूक जैसे अलगाववादी नेताओं के विचारों को प्रमुखता दी गई, जबकि आतंकियों और पत्थरबाजों का महिमामंडन किया गया। विवाद सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने तत्काल प्रभाव से दोनों पुस्तकों को सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से वापस लेने का आदेश दिया था। इसके साथ ही 8 अधिकारियों को निलंबित, एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त और दोनों पुस्तकों के लेखकों व प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। पूरे मामले की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्विनी कुमार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच भी शुरू की गई है, जिन्हें 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। जानकारी के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना के तहत सरकारी स्कूलों के लिए चयनित 463 पुस्तकों की विशेषज्ञ समिति ने समीक्षा की थी। इसी दौरान ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके’ और ‘ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ नामक 2 पुस्तकों में ऐसा कंटेंट पाया गया, जिसे अलगाववाद और आतंकवाद से जुड़ा तथा सामाजिक अशांति फैलाने वाला माना गया। पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और ऊधमपुर जिलों में, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामुला के सरकारी स्कूलों में भेजी गई थीं। विवाद सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि इन पुस्तकों के जरिए स्कूलों में राष्ट्रविरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि वह पुस्तक की सामग्री देखने के बाद ही इस पर टिप्पणी करेंगे। दूसरी ओर, पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने पुस्तक की सामग्री को अलगाववाद और भारत विरोधी सोच को बढ़ावा देने वाला बताया था।

अब प्रकाशक के कार्यालय पर छापेमारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पुस्तक की सामग्री को मंजूरी कैसे मिली, प्रकाशन और खरीद प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही तथा सरकारी स्कूलों तक इन पुस्तकों की आपूर्ति किस स्तर पर हुई। मामले में आगे और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी है। ‘पर्सनैलिटीज़ एंड लेजेंड्स ऑफ J&K’: इसके लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीना हैं, जबकि इसका प्रकाशन जम्मू स्थित ओबेरॉय बुक सर्विस द्वारा किया गया है। ‘ग्रेट पर्सनैलिटीज़ ऑफ़ जम्मू एंड कश्मीर’, इसके लेखक सुशांत गिरी हैं और इसका प्रकाशन दिल्ली स्थित अनुराग प्रकाशन द्वारा किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से एक किताब की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में भेजी गई थीं, जबकि दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में सप्लाई की गई थीं। स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर शुक्रवार को ही इन दोनों किताबों को वापस ले लिया था। काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस स्टेशन, जम्मू में इस मामले को लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया है।












