
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक आंदोलन के दौरान कुछ विद्यार्थियों एवं युवाओं द्वारा सार्वजनिक मंच से अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किए जाने की घटना ने पूरे देश में चिंता का विषय पैदा कर दिया है। इस प्रकार की घटनाएं स्पष्ट संकेत देती हैं कि आज की युवा पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति एवं उत्तम संस्कारों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य को लेकर भारत विकास परिषद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्कूलों एवं कॉलेजों में “संस्कार जागरूकता अभियान” प्रारंभ करने की घोषणा की है। इस अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा, शिष्टाचार, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, परिवार के प्रति सम्मान, गुरुजनों का आदर, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा मर्यादित भाषा के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।

इस अवसर पर परिषद के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है। यदि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार, नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण की प्रेरणा मिलेगी, तो वे भविष्य में न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और देश का भी नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि आज तकनीक और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चों पर अनेक प्रकार के नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं। ऐसे समय में अभिभावकों, शिक्षकों एवं सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को सही दिशा प्रदान करें और श्री अरोड़ा ने कहा कि भारत विकास परिषद अपने पंचसूत्र “संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा एवं समर्पण” को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। परिषद का मानना है कि यदि बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण विद्यालय स्तर पर ही कर दिया जाए तो वे जीवनभर अनुशासन, विनम्रता, सदाचार और सामाजिक जिम्मेदारियों का पालन करेंगे।इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों में प्रेरणादायक व्याख्यान, व्यक्तित्व विकास कार्यशालाएं, नैतिक शिक्षा संगोष्ठियां, भारतीय संस्कृति पर आधारित प्रतियोगिताएं, प्रेरक प्रसंग, महापुरुषों के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक विचार तथा संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें शिक्षाविदों, समाजसेवियों, आध्यात्मिक चिंतकों एवं प्रेरक वक्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि विद्यार्थी सकारात्मक सोच, संयमित व्यवहार और शालीन भाषा के महत्व को समझ सकें।संजीव अरोड़ा ने कहा कि बच्चों का व्यक्तित्व केवल पुस्तकीय ज्ञान से नहीं बनता, बल्कि उनके संस्कार, व्यवहार और चरित्र ही उनकी वास्तविक पहचान होते हैं।
इसलिए परिवार, विद्यालय और समाज तीनों को मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं, उन्हें भारतीय संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों से परिचित कराएं तथा स्वयं अपने व्यवहार से अच्छे संस्कारों का उदाहरण प्रस्तुत करें श्री अरोड़ा ने कहा कि परिषद का यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जन-जागरण आंदोलन होगा, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को संस्कारित, जिम्मेदार, राष्ट्रभक्त एवं चरित्रवान नागरिक बनाना है। परिषद को विश्वास है कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग से यह अभियान बच्चों में नैतिक मूल्यों को मजबूत करेगा तथा एक सुसंस्कृत, सभ्य और आदर्श समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अंत में संजीव अरोड़ा ने सभी शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों एवं समाजसेवी संगठनों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान करते हुए कहा कि “यदि हम बच्चों को अच्छे संस्कार देंगे, तो वे स्वयं अपने परिवार, समाज और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य बनेंगे। संस्कारवान पीढ़ी ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है।












