
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। सी.के.डी. इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, अमृतसर के वाइस प्रिंसिपल डॉ. गुरजीत सिंह ढिल्लों ने कहा है कि आज के तेजी से डिजिटल होते दौर में केवल पासवर्ड के भरोसे अपने ऑनलाइन खातों और निजी जानकारी को सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) डिजिटल सुरक्षा का सबसे प्रभावी और आवश्यक माध्यम बन चुका है। डॉ. ढिल्लों ने कहा कि भारत में इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और ई-गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार अभूतपूर्व गति से हुआ है। इसके साथ ही साइबर अपराध, फिशिंग, यूपीआई धोखाधड़ी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साइबर हमले, पहचान की चोरी, फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया हैकिंग जैसी घटनाओं में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

उन्होंने बताया कि टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन किसी भी ऑनलाइन खाते की सुरक्षा को दोगुना मजबूत बना देता है। इसमें पासवर्ड के अलावा एक अतिरिक्त सुरक्षा स्तर, जैसे कि OTP, ऑथेंटिकेटर ऐप, फिंगरप्रिंट या फेस आईडी के माध्यम से उपयोगकर्ता की पहचान की पुष्टि की जाती है। यदि किसी साइबर अपराधी को पासवर्ड मिल भी जाए, तब भी दूसरे सुरक्षा स्तर के बिना वह खाते तक पहुंच नहीं बना सकता।
डॉ. ढिल्लों ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने Gmail, WhatsApp, Instagram, Facebook, नेट बैंकिंग, UPI ऐप्स तथा अन्य महत्वपूर्ण ऑनलाइन खातों पर तुरंत 2FA सक्रिय करें। उन्होंने कहा कि आज साइबर अपराधी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर अधिक उन्नत तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। सार्वजनिक वाई-फाई, सिम स्वैप, क्यूआर कोड घोटाले और पासवर्ड लीक जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। उन्होंने सलाह दी कि ऑथेंटिकेटर ऐप और बायोमेट्रिक सुरक्षा (फिंगरप्रिंट या फेस आईडी) का संयुक्त उपयोग वर्तमान समय में सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक है। इससे व्यक्तिगत, वित्तीय और संस्थागत डेटा को प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखा जा सकता है।
शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक संगठनों के संदर्भ में डॉ. ढिल्लों ने कहा कि सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कंपनियों को अपने ई-मेल सिस्टम, छात्र पोर्टल, ईआरपी तथा अन्य डिजिटल सेवाओं पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करना चाहिए, ताकि साइबर हमलों से बचाव सुनिश्चित किया जा सके और डेटा सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने लोगों से अपने परिवार, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की, क्योंकि साइबर ठग अक्सर उन्हें अपना निशाना बनाते हैं।
अपने संदेश के अंत में डॉ. गुरजीत सिंह ढिल्लों ने कहा, “साइबर सुरक्षा अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि हर डिजिटल नागरिक की जिम्मेदारी है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को सक्रिय करने में केवल दो मिनट लगते हैं, लेकिन यह आपकी मेहनत की कमाई, निजी जानकारी और मानसिक शांति को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।” उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और साइबर अपराधों से सावधान रहें।











