Wednesday, October 28, 2026
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ISRO ने रचा इतिहास, GSLV-F17 के साथ लॉन्च हुआ ‘बाज’ सैटेलाइट EOS-05 

दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने GSLV-F17 रॉकेट से देश के पहले समर्पित जियो-इमेजिंग उपग्रह EOS-05 का सफल प्रक्षेपण किया। करीब 18 मिनट की उड़ान के बाद 2,367 किलोग्राम वजनी उपग्रह को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया। इस सफलता के साथ इसरो ने वर्ष 2026 का अपना पहला सफल प्रक्षेपण किया। EOS-05 को आगे की कक्षीय प्रक्रियाओं के जरिए करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाले जियो प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जाएगा। इसरो के अनुसार, उपग्रह से लगभग वास्तविक समय में तस्वीरें मिलने की उम्मीद है। इनका इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन और अन्य राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।

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इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने प्रक्षेपण के बाद कहा कि GSLV-F17 ने उन्नत EOS-05 उपग्रह को निर्धारित कक्षा में सटीकता के साथ स्थापित किया। उन्होंने बताया कि यह श्रीहरिकोटा से 107वां प्रक्षेपण और GSLV का 19वां मिशन है। उन्होंने कहा कि GSLV की क्षमता में लगातार सुधार किया गया है। संरचनात्मक भार को अनुकूलित करने और प्रणोदन प्रणाली में सुधार के बाद अब इस रॉकेट से 2,367 किलोग्राम का सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपित किया गया है। EOS-05 का प्रक्षेपण शुक्रवार सुबह 2:55 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से हुआ। 51.7 मीटर लंबा तीन चरणों वाला GSLV रॉकेट 420.5 टन के लिफ्ट-ऑफ मास के साथ रवाना हुआ। इसके तीसरे चरण में क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया है। बारिश और तड़के का समय होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्रक्षेपण देखने पहुंचे। इसरो के मुताबिक, उपग्रह के सौर पैनल सफलतापूर्वक तैनात हो गए हैं और इसके सभी सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। मिशन निदेशक थॉमस कुरियन ने EOS-05 को निकट वास्तविक समय में इमेजिंग क्षमता वाला विशिष्ट उपग्रह बताया।

परियोजना निदेशक (सैटेलाइट) इम्तियाज अहमद ने इसे मल्टी-बैंड क्षमता वाला जटिल उपग्रह बताया। GSLV-F17/EOS-05 मिशन को 2021 के असफल GSLV-F10/EOS-03 मिशन के बाद तैयार किया गया। उस मिशन में उड़ान के 307 सेकंड बाद ऑनबोर्ड कंप्यूटर ने प्रक्षेपण को रोक दिया था। जांच में क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई तकनीकी समस्या को मिशन की विफलता का कारण बताया गया था। वहीं, 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 मिशन में तीसरे चरण में आई तकनीकी समस्या के कारण 16 उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका था। करीब आठ महीने के अंतराल के बाद मिली यह सफलता इसरो के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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