
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में संवाद साहित्य मंच द्वारा डा.धर्मपाल साहिल के 14 वें उपन्यास”मोर नाच “का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। उपन्यास के लोकार्पण की रस्म मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो.हरमहेंद्र सिंह बेदी ( कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश) ,अध्यक्ष प्रिं.डॉ. गुरनाम कौर, विशिष्ट अतिथि डॉ.विनोद कुमार शर्मा एवं अशोक नादिर एवं प्रेम विज आदि ने करतल ध्वनि के बीच निभाई।इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ.बेदी ने कहा, पंजाब में आंचलिक उपन्यास लेखन की परम्परा में उपेंद्रनाथ अश्क, जगदीश चन्द्र के बाद डॉ धर्मपाल साहिल ने मचान,कोहकनी, डांडी और अब मोर नाच उपन्यासों के द्वारा इस कड़ी को आगे बढ़ाया है। मोर नाच केवल कंडी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व ही नहीं करता बल्कि देश भर में जहां जहां भी विकास के नाम पर विनाश हुआ है उसकी शिद्दत के साथ निशानदेही करता है। अध्यक्षीय सम्बोधन में डा. गुरनाम कौर ने डॉ साहिल के उपन्यासों की प्रथम पाठिका होने तथा उनके माध्यम से कंडी की संस्कृति व सभ्याचार से परिचित होने के बारे में बताया। अशोक नादिर ने उपन्यास की रोचकता और पठनीयता को विशेष गुण बताया। कुलदीप शर्मा ने कहा मोर नाच का नायक बिरजू न होकर समूचा गांव ही नायक है।सभी गांववासी मोर नाच करते प्रतीत होते हैं। रत्न चंद रत्नेश ने उपन्यास में पर्यावरण के हो रहे क्षरण और स्थानीय संस्कृति की पेशकारी को महत्वपूर्ण माना। प्रो.सुखदेव मिन्हास ने डॉ साहिल की निरंतर साहित्य साधना और कर्मठता को प्रेरणादायक बताया।

डॉ शशिप्रभा ने डॉ साहिल के मोर नाच सहित अन्य उपन्यासों में आदर्श प्रेम कथा की उपस्थिति बताया, जिसमें नायक नायिका का मिलन नहीं हो होता।मंचाध्यक्ष एवं मंच संचालक की भूमिका निभा रहे प्रेम विज ने कहा कि “मोर नाच” की विशेषता आंचलिकता की सजीवता है इसके अतिरिक्त आंचलिक भाषा और पात्रों का जीवन चित्रण भी इसके विशेष गुण हैं।डॉ.विनोद शर्मा ने उपन्यास उपन्यास के शीर्षक” मोर नाच”को प्रतीकात्मक बताते हुए उपन्यास के एकदम उपयुक्त कहा। डॉ.अवतार पतंग ने डॉ साहिल द्वारा हिन्दी और पंजाबी दोनों भाषाओं में उत्कृष्ट उपन्यास लेखन को सराहा।अंत में लेखक डॉ धर्मपाल साहिल ने संवाद साहित्य मंच चंडीगढ़ सहित समूह अतिथियों का धन्यवाद किया और अपनी औपन्यासिक यात्रा व मोर नाच की सृजन प्रक्रिया से अवगत कराया। उपन्यास मोर नाच पर गम्भीर और सार्थक विचार चर्चा के साथ विचार गोष्ठी सम्पन्न हुई।












