Wednesday, October 14, 2026
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डा. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन विद्यार्थियों एवं युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत: संजीव अरोड़ा

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर भारत विकास परिषद के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. कलाम का जीवन देश के विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि मेहनत, अनुशासन, दृढ़ संकल्प और ज्ञान के बल पर जीवन में बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
इस अवसर पर विद्यार्थी दिवस के महत्व का उल्लेख करते हुए संजीव अरोड़ा ने कहा कि विद्यार्थियों को प्रेरित करना, उन्हें सही दिशा दिखाना और उनके भीतर देश एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थी किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। आज के विद्यार्थी ही भविष्य में देश के वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक, प्रशासक और जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे।

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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी उतना ही जरूरी है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि एक ईमानदार, अनुशासित, संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनना भी है। संजीव अरोड़ा ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित करके निरंतर मेहनत करनी चाहिए। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का सदुपयोग ज्ञान बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर खेलकूद, पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियों और समाजसेवा में भाग लेना चाहिए।श्री अरोड़ा ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता, शिक्षकों और समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

विद्यार्थियों को बड़ों का सम्मान करने, जरूरतमंदों की सहायता करने, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने की प्रेरणा दी जानी चाहिए। भारत विकास परिषद के मूल मंत्र संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण का उल्लेख करते हुए संजीव अरोड़ा ने कहा कि इन मूल्यों को विद्यार्थियों के जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। जब शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होगा, तभी एक सशक्त, समृद्ध और विकसित भारत का निर्माण संभव होगा। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा लेकर बड़े सपने देखें, मेहनत और ईमानदारी को अपना मूल मंत्र बनाएं तथा अपनी सफलता के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दें।

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