
ब्लैक हो रहा वाइट-1
EDITOR’S OPINION BY:- SANDEEP DOGRA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 एवं 1000 रुपये के नोटों पर पाबंदी लगाए जाने से भले ही यह कयास लगाए जा रहे हों कि अब काले धन वालों की खैर नहीं परन्तु प्रधानमंत्री के इस आदेश के बाद से काले को सफेद करने का जो घलमेल शुरु हो गया है उससे लगता है कि इस फैसले की सारी परेशानी आम जनता के लिए ही है, जबकि काले धन के लोभी यानि ब्लैक मनी के स्टॉकिस्ट तो अब भी मजे में हैं। सरकार की सख्ती के बावजूद काले धन के व्यापारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अन्य क्षेत्रों को छोड़ बात अगर होशियारपुर की, की जाए तो यहां पर बड़े-बड़े मगरमच्छों ने अपना काला धन इतनी होशियारी के साथ एडजस्ट करना शुरु कर दिया है कि अच्छे से अच्छा भी चकरा जाए। ऐसे करने वालों में शहर के अधिकतर डाक्टर भी पीछे नहीं हैं। आज हम ऐसे ही कुछ डाक्टरों की बात करेंगे।
काले धन की परेशानी में मरीज़ भी नहीं देखे जा रहे?
होशियारपुर में निजी अस्पताल चलाने वाले कुछेक डाक्टरों तो काले धन को एडजस्ट करने की परेशानी में अपने मरीजों को भी ठीक ढंग से नहीं देख पा रहे। इतना ही नहीं सूत्रों से मिली जानकारी अुसार अधिकतर डाक्टरों ने मिलीभगत करके पुरानी डेट्स में मैडीकल से जुड़े उपकरण खरीदने शुरु कर दिए हैं तथा कंपनी वालों को पुरानी करंसी में भुगतान करने में लगे हैं ताकि अधिक से अधिक ब्लैक को वाइट किया जा सके। इतना ही नहीं जमीनों की खरीदो-फरोख्त और फाइनांसरों तथा लिमिटों के माध्यम से भी पैसे को एडजस्ट करने की होड़ में कई लोग खूब मालामाल हो रहे हैं, क्योंकि ब्लैक को वाइट करने की एवज में मोटी सौदेबाजियां जो रहो रही हैं।
अधिकतर डाक्टरों को नहीं दिखता सरकार का डर?
ब्लैक को वाइट करवाने में लगे कुछेक डाक्टरों की बात करें तो उनकी कमाई तथा खर्च का अगर सही आंकलन लगाया जाए तो उसके बाद जो नतीजे जाएंगे उन्हें देखने के बाद अधिकतर लोगों के मुंह से एक ही बात निकलेगी कि ‘मोदी जी’ ने जो किया अच्छा ही किया। परन्तु काले धन पर कुंडली मारे बैठे डाक्टरों के न तो तेवर बदले रहे हैं और न ही उन्हें सरकार का कोई डर दिखाई दे रहा है, जिसके चलते कोई न कोई जुगत भिड़ाकर वे ब्लैक को खपाने में लगे हैं। यहां तक कि कई डाक्टरों द्वारा तो यहां तक भी सौदेबाजी कर ली गई है कि काले धन का मामला ठंडा पडऩे पर पैसा वापस और काले धन का फिर से वही खेल शुरु होगा जो भारत सरकार के इस फैसले से पहले खेला जा रहा था। भले ही आय से अधिक संपत्ति एवं काले धन वालों पर इनकम टैक्स विभाग व इससे जुड़े अन्य विभागों की नजऱ है, परन्तु इस बात से बेखौफ शहर के अधिकतर डाक्टर किसी न किसी माध्यम से ब्लैक को खपाने में लगे हैं। यहां तक कि यह भी पता चला है कि पुरानी डेट में बड़े-छोटे आप्रेशन के बिल बनाने से भी परहेज नहीं किया जा रहा। विश्वसनीय सूत्रों से यह भी पता चला है कि कई डाक्टरों ने तो पुरानी विलिंग में गाडिय़ां तक भी खरीद ली हैं ताकि किसी न किसी तरीके से पैसे को खपाया जा सके।
साहब जी! आ डाक्टरनियां तों वी पुछ गिच्छ कर लो?
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार शहर में महिला रोगों से जुड़ी ज्यादातर डाक्टरनियों की रोजाना आमदन पर अगर नजऱ दौड़ाई जाए तो उसके आगे सभी डाक्टर बौने दिखाई देने लगेंगे। सूत्रों का कहना है कि अगर विभाग निष्पक्ष एवं सत्य आधारित जांच करे तो इनके ब्लैक मनी के गौरखधंधे से पर्दा उठ जाएगा और सरकारी सिस्टम को कोसने वालों की असलीयत जनता के सामने होगी। हो सकता है कि सरकार की इस कार्रवाई से सबक लेते हुए काले धन के लोभी डाक्टर लोगों को सस्ता इलाज मुहैया करवाना शुरु कर दें।












