
होशियारपुर (दस्टैलर न्यूज़)। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही रही हैं। इसी कड़ी के तहत लगभग हर प्रत्याशी रुठों को मनाने और जोड़ तोड़ करके अपना पक्ष मजबूत करने में लगा है।
इसी जोड़ तोड़ की कड़ी के तहत अभी तक विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार भाजपा को एक बड़ा झटका लग सकता है। संघ की विभिन्न शाखाओं से जुड़े रहने वाले और वर्तमान समय में अग्रवाल सम्मेलन के प्रांतीय पदाधिकारी तथा मनोहर सेवा समिति के अध्यक्ष सेठ नवदीप कुमार अग्रवाल कांग्रेस में जा सकते हैं। पिछले लंबे समय से कांग्रेसी उन्हें कांग्रेस में शामिल करने के प्रयास कर रहे थे तथा हाल ही में भी सेठ साहिब के साथ कई बैठकें करके उनका हृदय परिवर्तन करने में काफी हद कर कांग्रेस को कामयाबी भी मिली है। (दस्टैलर न्यूज़) जिसके चलते सेठ नवदीप अग्रवाल जल्द ही कांग्रेस में जाने की घोषणा कर सकते हैं। कांग्रेस के अलावा कुछ अन्य दल भी सेठ साहिब को अपनी पार्टी में शामिल करने की कोशिशों में हैं। अगर ऐसा होता है तो इसे भाजपा को बड़ा झटका कहा जा सकता है। क्योंकि सेठ नवदीप कुमार अग्रवाल समाज सेवा से जुड़े ऐसे कार्यकर्ता हैं जिनकी अपने समाज के साथ-साथ लगभग हर वर्ग में एक अलग छाप है और अब प्रदेश स्तरीय अग्रवाल समाज की जिम्मेदारी होने के चलते सेठ अपनी एक अलग पहचान भी रखते हैं। (दस्टैलर न्यूज़) ऐसे में अब जबकि भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती, ऐसे में अगर सेठ कांग्रेस के हो जाते हैं तो इस भाजपा के लिए बड़ी क्षति भी कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। विश्वसनीय सूत्रों की माने तो सेठ साहिब अपने पारिवारिक परेशानियों को लेकर काफी परेशान रहे हैं और उनका कहना है कि उनके परेशानी बढ़ाने में उस पार्टी के लोगों ने उनके जले पर नमक छिडक़ा जिसके लिए उन्होंने दिन रात एक करके काम किया। इसलिए वह उनके साथ नहीं चल सकते और वह खुद भी अपनी पार्टी में घुटन सी महसूस करने लगे हैं। अगर समय रहते भाजपा ने सेठ जैसे कर्मठ कार्यकर्ता और एक समाज सेवी की बांह न पकड़ी तो आने वाले समय में ऐसे कई कार्यकर्ताओं व नेताओं से भाजपा को हाथ धोना पड़ सकता है। दूसरी तरफ कांग्रेसी सूत्रों की माने तो एकाध दिन में सेठ साहिब के कांग्रेस में आने की घोषणा हो सकती है। हालांकि बात करने पर सेठ नवदीप अग्रवाल ने ऐसी किसी भी आशंका से इंकार किया परन्तु उन्होंने इतना जरुर कहा कि अब भाजपा से नाराज हैं। पार्टी में गुटबाजी और चंद मौकाप्रस्त लोगों के रहते काम करना मुश्किल है। इसलिए अभी वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं कि वह किस तरफ जाएंगे। अगर, भाजपा में यही हालात रही तो शायद उनका फैसला पार्टी विरोधी भी हो सकता है। (दस्टैलर न्यूज़)











