
हमीरपुर (वरिष्ठ पत्रकार रजनीश शर्मा): राज्य आपदा प्रबन्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष राजेन्द्र राणा ने कहा है कि भाजपा नेता अपने दलगत स्वार्थ के लिए प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल पैदा करके विकास प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे है, लेकिन उनके मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे। आज यहां मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए राजेन्द्र राणा ने कहा कि भाजपा नेता प्रदेश में सत्ता हाथ से निकल जाने के बाद से बेचैनी के आलम में हैं और वे प्रदेश में वीरभद्र सरकार गिरने और नये चुनाव होने की भविष्यवाणियां करके जनता को गुमराह करने के प्रयासों में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के पहले दिन से ही यह राग आलाप रहे हैं कि प्रदेश में चुनाव जल्दी ही हो जाएंगे, लेकिन अब तक न तो उनके मंसूबे पूरे हुए हैं और न ही उनकी भविष्यवाणियां सही साबित हुई हैं। लिहाजा भाजपा नेताओं को अब याली पुलाव पकाने बन्द कर देने चाहिए और एक सकारात्मक व रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाते हुए प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान देना चाहिए। राजेन्द्र राणा ने कहा कि प्रदेश के भाजपा नेता लोकसभा चुनावों से पहले अच्छे दिन लाये जाने और महंगाई कम करने का ढिंडोरा पीटते नहीं थकते थे, लेकिन यूपीए सरकार के कार्यकाल में जिन दालों का रेट 60-70 रूपये प्रति किलो था, वह अब 200 रूपये का आंकड़ा पार करता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता जनार्दन अब यही पुकार कर रही है कि उनके पुराने दिन ही उन्हें लौटा दो, उन्हें ऐसे अच्छे दिन नहीं चाहिए, जिसमें गरीब की थाली से चपाती व दालें गायब हो रही हों। राजेन्द्र राणा ने कहा कि प्रदेश के भाजपा नेताओं को जनता की चिंता है, तो उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास खड़े होकर महंगाई खत्म करने की गुहार लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस रफतार से महंगाई बढ़ रही है और समाज का हर वर्ग मोदी सरकार के झूठे लारे-लप्पों से परेशान है, उसकी भाजपा नेताओं को आगामी चुनावों में भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। राजेन्द्र राणा ने कहा कि प्रदेश के भाजपा नेताओं से जनता यह जानना चाहती है कि उन्होंने मोदी सरकार से अब तक हिमाचल के कितने बेरोजगारों को रोजगार दिलवा दिया है और विदेशों से काला धन वापिस लाकर कितने लोगों के खाते में 15-15 लाख रूपये डाल दिये हैं। राणा ने कहा कि भाजपा नेताओं को फौरन ऐसे लाभार्थियों की सूची जारी करनी चाहिए, जिनके अच्छे दिन आए हैं।












