Sunday, October 18, 2026
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2022 के लिए नयी ‘पंजाब अनाज लेबर नीति’ और संशोधित हुई ‘पंजाब अनाज ट्रांसपोर्ट नीति’ को मंजूरी

चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली मंत्री मंडल ने आज साल 2022 के लिए नयी ‘पंजाब अनाज लेबर नीति’ और संशोधित हुई ‘पंजाब अनाज ट्रांसपोर्ट नीति’ को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता को और सुनिश्चित बनाने के लिए व्यापक हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ अनावश्यक मुकदमेबाज़ी को घटाना है।  यह फ़ैसला आज यहाँ पंजाब सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता अधीन हुई मंत्री मंडल की मीटिंग के दौरान लिया गया।  

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इन विवरणों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि संशोधित हुई ट्रांसपोर्ट नीति अब धान की खरीद और मिलिंग के लिए कस्टम मिलिंग नीति के साथ मेल खाती है और मिलिंग नीति को मंत्री मंडल द्वारा कुछ दिन पहले मंजूरी दी गई थी। उन्होंने कहा कि पहली बार संशोधित हुई ट्रांसपोर्ट नीति में सरकार द्वारा खऱीदे गए अनाज की ढुलाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हरेक वाहन में वाहन ट्रेकिंग सिस्टम लगाने की व्यवस्था अनिवार्य बनाई गई है। उन्होंने कहा कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग ने वाहन ट्रेकिंग प्रणाली प्रदान करने वाली कंपनियों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है और मौजूदा अनाज खरीद पोर्टल को इन प्रणालियों के अनुकूल बनाना है।  


लेबर नीति के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि नीति का उद्देश्य मौजूदा लेबर और कारटेज नीति को ख़त्म करके लेबर ऐसोसीएशनों की व्यापक हिस्सेदारी को सुनिश्चित बनाना है। पिछले कई दशकों से अमल अधीन मौजूदा लेबर और कारटेज नीति को बहुत से लोगों द्वारा ठेकेदारों के पक्ष में समझा जाता था, क्योंकि इसमें एक ही व्यक्ति द्वारा लेबर और यातायात की सेवाएं प्रदान किया जाना शामिल था। उन्होंने बताया कि आज कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई नीति से लेबर और यातायात की सेवाओं को पूरी तरह से अलग कर दिया गया है, जिससे लेबर ऐसोसीएशनों को टैंडर प्रक्रिया में सीधे तौर पर हिस्सा लेने के अधिक मौके प्रदान किये गए हैं, जिससे ठेकेदार के लाभ को हटाकर सीधे तौर पर उनकी आमदन में वृद्धि होगी।

 
लेबर और ट्रांसपोर्ट नीतियों के पहलुओं को उजागर करते हुए प्रवक्ता ने बताया कि कुछ मौजूदा व्यवस्थाओं को हटाकर व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कोशिश की गई है, जिसका कई बार दुरुपयोग होता था और अनावश्यक मुकदमेबाज़ी का कारण बनते थे। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में टैंडर प्रक्रिया के दौरान दस्ती दस्तावेज़ों को जमा करवाए जाने को पूरी तरह से ख़त्म करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, क्योंकि बहुत से टैंडर अक्सर उनके जमा करवाए गए दस्तावेज़ों में मामूली त्रुटियों के कारण रद्द कर दिए जाते थे।  


नये उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की सोच के अनुसार इस नीति ने पहली बार पुराने तजुर्बों की ज़रूरत से बगैर टैंडरों में हिस्सा लेने की इजाज़त दी है। उन्होंने कहा कि ट्रकों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और मज़दूरों के आधार नंबरों के विवरणों को जमा करवाने की ज़रूरत को भी ख़त्म कर दिया गया है, क्योंकि इसके नतीजे के तौर पर अक्सर मामूली खामियों के कारण बोली रद्द हो जाती थी और बाद में अनावश्यक मुकदमेबाज़ी का कारण बन जाता था।  


प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस नीति ने टैंडर किये कलस्टर का आकार 50 हज़ार मीट्रिक टन तक सीमित कर दिया है। इसी कारण एक कलस्टर में वाहनों और मज़दूरों की ज़रूरत घटने की आशा है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। इससे पहले किसी कलस्टर के आकार को निर्धारित करने के लिए कोई मापदंड नहीं था जो कि कम से कम 5000 मीट्रिक टन से लेकर अधिक से अधिक 2 लाख मीट्रिक टन तक अलग-अलग आकार का होता है। दोनों नीतियों ने अब डिप्टी कमिश्नर को टैंडर कमेटी का चेयरमैन बना दिया है।  

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