
होशियारपुर(द स्टैलर न्यूज़)। शिक्षा मानवीय जीवन की एक बुनियादी ज़रूरत है और शिक्षक का दायित्व समाज को अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर लेकर जाना है। परंतु वर्तमान पंजाब सरकार अध्यापक को उसका उचित स्थान देने से पीछे भाग रही है जिसके चलते अध्यापक अपना जीवन तक समाप्त करने को बाध्य हो गये हैं। ये बात पंजाब भाजपा प्रदेश सचिव मीनू सेठी ने 1158 पोस्टों पर चुने गये प्राध्यापकों में से एक प्रो. बलविंदर कौर द्वारा आप सरकार के उदासीन रवैये से तंग आकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने पर कहे। मीनू सेठी ने कहा कि पहले कांग्रेस सरकार ने नियुक्ति पत्र देकर इन अध्यापकों को सपने दिखाये और पात्र मिलने के बाद कई कार्यरत प्राध्यापकों ने अपनी वर्तमान नौकरी से इस्तीफ़ा देकर सरकारी नौकरी जॉइन कर ली थी और कुछ को नौकरी का पत्र मिला परंतु जॉइनिंग नहीं हुई।

फिर आप सरकार ने इन पोस्टों पर हुए केस के संदर्भ में कोर्ट में कुछ भी संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं करवायी। ऐसा होने पर उन 1158 प्राध्यापकों के साथ अन्याय हुआ जिनका भविष्य कटघरे में लटक गया। प्रो बलविंदर कौर का मानसिक उत्पीड़न से गुज़रना इसी श्रृंखला का हिस्सा है।पंजाब की आप सरकार के शिक्षा मंत्री हरज्योत बैंस का रवैया इन प्राध्यापकों के प्रति तानाशाही वाला रहा है और उनके भविष्य को गौण मुद्दा मान कर यह विषय ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और उन्हें दुतकारने वाली स्थिति बना दी गई। बेहद दुख का विषय है की ये सरकार भी पूर्व की कांग्रेस सरकार की भाँति लॉलीपॉप देकर पंजाब को भ्रमित करने पर उतारू है। इस समय पंजाब एक नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है।जब राष्ट्र निर्माता प्राध्यापकों को ख़ुद की जीवन लीला समाप्त करने जैसा घातक कदम उठाना पड़े तो समाज का भगवान ही रक्षक है।उन्होंने कहा कि पंजाब के शिक्षा मंत्री को इस घटनाक्रम के चलते नैतिकता के आधार पर मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए और उन पर बनती कार्यवाही करनी चाहिए।












