
लोकसभा चुनाव को लेकर पंजाब की एक सीट से कांग्रेस पार्टी द्वारा घोषित की गई उम्मीदवार को लेकर आज ही चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है तथा आने वाले समय में कांग्रेस के लिए हालात कैसे रहते हैं इसे लेकर टकसाली कांग्रेसी अभी से चिंता में डूब गए हैं। आलम यह है कि नेताओं के कहने के बावजूद भी अधिकतर पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उम्मीदवार के हक में चलने को तैयार नहीं तथा उन्हें इस बात का भी रोष है कि एक पूर्व मंत्री की छत्रछाया में कामयाब होने के ख्याब देखने वाले इस उम्मीदवार का भविष्य में उनके प्रति क्या रुख रहता है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार टिकट की घोषणा के बाद से ही उम्मीदवार द्वारा कई लोगों को मौके पर यूज़ करके दूध में बाल की तरह इस तरह बाहर कर दिया गया कि जैसे वे उन्हें जानती ही न हो तथा इतना ही नहीं कई पदाधिकारियों द्वारा फोन किए जाने के बावजूद न सिर्फ उन्हें समय देकर मिलना जरुरी समझा गया तथा न ही पुनः फोन करने पर बात की गई।

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जिससे उनके आत्मसम्मान को काफी ठेस पहुंची है तथा वे किसी भी सूरत में पार्टी उम्मीदवार के साथ चलने को तैयार नहीं हो रहे। हालांकि जिला कांग्रेस द्वारा बैठकें करके उम्मीदवार को सारी बातों से अवगत भी करवा दिया गया तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को भी साथ चलने की बात कही गई है, लेकिन इन सबके बावजूद अधिकतर कार्यकर्ता उम्मीदवार के साथ चलने को राजी नहीं तथा उनकी आपस में चर्चा है कि एत्थे कांग्रेसी केहड़ा सुखी आ, जेहड़ा उम्मीदवार अज्ज ई फोन नहीं चक्कदा, उदे तों की उम्मीद, पार्टी दे बज्जे आं ओहदे नीं। पार्टी दे कहण ते कम्म तां करांगे पर उदे लई मन नी मनदा।
और तो और चर्चा है कि जिला कमेटी को छोड़ उम्मीदवार का एक धड़े के साथ अधिक तालमेल व उनके कहने पर चलने को लेकर भी अधिकतर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है कि यह समय सभी को साथ लेकर चलने का है तथा अगर समय पर एसा न हुआ तो नतीजा कुछ और ही होगा। दूसरी तरफ देखा जाए तो जो धड़ा नजदीक होने का दावा भी कर रहा है उसमें भी कई एसे हैं जो शाम को जिला कमेटी के कुछेक पदाधिकारियों को सारी रिपोर्ट देकर अपना दामन साफ एवं एक होने का दिखावा करके कौन सी ईमानदारी निभा रहे हैं यह भी चर्चाओं में है। जिसके चलते कौन कब कहां क्या करता है व कहता है, की चर्चाओं से भी कांग्रेस के भीतर चल रहे द्वंद की पोल खुलती नज़र आ रही है। जिसका सीधा असर कांग्रेस के पक्ष में होने वाले मतदान को प्रभावित करने के लिए काफी है।
क्योंकि पहले ही पंजाब के बाहर आप और कांग्रेस के गठजोड़ को लेकर कांग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती, क्योंकि पंजाब में वैरी तो दूसरे राज्यों में ईलू-ईलू जैसी चर्चाएं पहले ही कांग्रेस की काफी किरकिरी कर चुकी हैं। यह भी चर्चा है कि एक पूर्व मंत्री के इशारों पर अंदरखाते सारा खेल खेला जा रहा है तथा जिला स्तर के कई नेताओं एवं पदाधिकारियों को जानबूझकर नज़रअंदाज किए जाने के पासे फिंकवाए जा रहे हैं, ताकि बाहर होते हुए भी उनका सिक्का चलता रहे।
दूसरी तरफ जिला स्तरीय कई नेताओं एवं पदाधिकारियों ने तो पहले ही साफ कर दिया था कि अगर बात सम्मान पर आएगी तो फिर पार्टी के विपरीत जाने में भी उन्हें कोई नहीं रोक सकता तथा क्योंकि वह पार्टी के सच्चे सिपाही हैं और पार्टी उम्मीदवार के साथ चलने को तैयार हैं, पर आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि उम्मीदवार में क्या बदलाव आते हैं और क्या सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर चलेंगे तथा पार्टी को अलविदा कह गए नेताओं के कौन से पासे नुकसान करते हैं और कौन से फायदा यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल कांग्रेस की स्थिति उस नांव जैसी कही जा सकती है जिसके सवारों को पता ही नहीं कि नांव चलाने के लिए ख्वेइया की क्या भूमिका होती है। मुझे दें इजाजत, जय राम जी की।












