रथ यात्रा के उपलक्ष्य मे दसवीं संध्या फेरी में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़

कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-गौरव मढ़िया। 29 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में सोमवार को इस्कान कपूरथला की  ओर से दसवीं संध्या फ़ेरी ग्रीन पार्क गली 2 से 5  मैं बड़ी ही धूमधाम से निकाली गई। संध्या हरिनाम फेरी में भक्तों का सैलाब  देखने को मिला। जिससे पता  चलता है कि लोगो मे  भगवान की रथ यात्रा को लेकर  कितना  उत्साह  है। भगवान जगन्नाथ जी ने घर घर जाकर लोगों को अपने पवित्र दर्शन दिए तथा मोहल्ला वासिओं ने बड़े ही उत्साह से भारी फूलों की वर्षा करके भगवान का सुंदर भव्य स्वागत किया। मोहल्ला निवासियों  ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया।  ये  संध्या हरिनाम श्री शिव लाल कौड़ा जी के  निवास स्थान से शुरू होकर धवन परिवार के  निवास स्थान पर जाकर समाप्त हुआ। KSCAD हाउस  में भक्तों ने कृष्णाप्रेम में भावपूर्ण नृत्य करके ब्रज वृंदावन धाम जैसे सुंदर वातावरण की अनुभूति करवाई । भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते  हुए  श्री नकुल दास ( नीरज  अग्रवाल) जी ने रुक्मणि द्वादशी का आध्यात्मिक जीवन में महत्व बताते हुए शास्त्रों से कथा सुनाई। उन्होंने कहा की पदम् पुराण में बताया गया है, जो स्थान वृन्दावन में श्रीमती राधा रानी का है वाही स्थान द्वारिका में रुक्मणि माता का है। तो क्या दोनो एक ही हैँ। श्रीमती राधा रानी सभी शक्तिओं का विस्तार करने वाली आदि शक्ति हैँ। क्योंकि वो भगवान की अंतरंगा शक्ति हैँ, उन्हीं से माता लक्ष्मी जी प्रकट होती हैँ और लक्ष्मी माइया का ही एक रूप रुक्मणि माता हैँ।

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जिस प्रकार भगवान् वृन्दावन में श्रीमती राधा रानी के बिना नहीं रह सकते उसी तरह द्वारिका में भगवान रुक्मणि जी के बिना नहीं रह सकते। इसी लिए पदम पुराण में वर्णन है की रुक्मणि देवी, श्रीमती राधा रानी  का अंश हैँ। उन्हीं रुक्मणि माताजी का प्रकट्या आज के ही दिन हुआ। इसी लिए आजके दिन को रुक्मणि द्वादशी कहा जाता है। इनके पिता विधर्व के राजा भीष्म थे। यूँ तोह भगवान कृष्ण की अनेक लीलायन है परन्तु रुक्मणि विवाह उनकी बहुत ही महत्वपूर्ण लीला है। जिससे हमें बहुत सी शिक्षाएं मिलती हैँ। पिता की सभा में बहुत से ऋषि मुनी आते थे और भगवान् की कथाएं का गुणगान करते थे। केवल श्रवन मात्र से ही रुक्मणि माता को भगवान् से प्रेम हो गया। इसीलिए अगर हम भी भगवान की कथाओं का श्रवण करें गे तो हमे भी भववान से प्रेम हो जायेगा। और उन्होंने पदम पुराण में वर्णित भगवान श्री जगन्नाथ जी के रूप का वर्णन किया। प्रभु जी ने  बताया  कि  जब द्वारिका पुरी में, भगवान श्री कृष्णा ,माता रूकमणिी द्वारा  गोपियो के शुद्ध प्रेम की  गाथा को सुनते हैं तो ब्रज प्रेम के ताप से  उनके हाथ पिघलने लगे ओर उनकी आखे खुली की खुली रह गयीं! तब वहा   नारद जी प्रकट  हुए ओर भगवान जगन्नाथ जी  के समक्ष बोले की हे भगवान!  हम सभी आप  का  ये प्रेम पूर्ण कृपामयि  रूप देखने के लिए कई जनमों से  तरस  रहे थे।  नारद जी ने  भगवान से  वचन लिया की कल्युग मे  आप    मानव जाति का उद्धार  करने के लिए ,अपने इस दिव्या तथा भव्य रूप में अवश्य प्रकट हों .. भगवान ने  कहा की  मै भगवान जगन्नाथ लकड़ी के स्वरूप मे लोगों का  उधार करने के लिए आऊगा.  आज वही जगन्नाथ पुरी धाम यहा पर भगवान  जी  अपने  बड़े  भाई  बलदाऊ ओर भहन सुभद्रा सग विराजित है.  वहा के  महाराज इन्द्रधुम थे उनके सपने  में आकर  भगवान ने  कहा  था कि मै  यहा लकड़ी के रुप मे अवतार लुगा जिससे मानव जाति का क्ल्याण हो सके।

ये मानव जीवन  बहुत ही  जन्मो के  बाद मिला  है ओर जीव ऐसे ही बहुमुल्य जीवन को व्यर्थ  गवा  रहा  है।  हमे ये  मानव  शरीर  बार  बार  नही  मिलेगा।  अगर  इसी  जीवन  मे  भक्ति  करके  भगवान कृष्ण को पा  लिया तो  ठीक, नहीं तो  आगे  84 लाख योनिया  हमारा  इन्तजार  कर  रही  हैँ। इसका  कारण ये है की  मानव  देह  पाकर  मनुष्य सोचता है  की  उसकी  मृत्यु  नही  होगी ओर  वह  हमेशा के लिए इस  धरती पर  वास  करेगा. पर ऐसा  नही  होगा क्युकि  जिसका  जन्म हुआ है उसकी  मृत्यु निश्चित है. आज  मानव  अपने प्रति  अन्जान है उसे पता ही नहीं अपने बारे मे की वो  कौन है, कहा से आया है, क्यु आया वह, ओर इस धरातल  पर क्या  कर रहा है।  उसके जीवन  लेने  का  कारण क्या है।  उसे आज आधात्मिकता के बारे कुछ भी नहीं  पता।  ओर  न ही वो इसे  जानने  का  प्रयास  कर रहा है।  कारण ये है की  आज जीव के  पास समय ही नही है।   वो अपने जीवन मे  इतना डुबा  हुआ है की  जीवन मे  हर सुख को प्राप्त करने के लिए दिन भर भाग  रहा है पर  सुख मिलता  भी  है तो कुछ समय की लिये उसके  बाद  वो  फिर  दुखी हो  जाता  है  सुख केवल ओर  केवल  भगवान  जगन्नाथ जी के चरणों मे है ओर कही  नही। इसिलिये हमें हर समय भगवान की सेवा करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

आगे बताते हुये नीरज अग्रवाल (नकुल दास) जी  ने  कहा की  29 जून को सभी शहर  निवासियो के  सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। इन हरिनाम संध्या फेरिओं से हम सभी का हृदय शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भगवान् हमारे हृदय में प्रवेश कर सकें। जिसके  लिये  हर दिन संध्या हरिनाम निकाल कर लोगो को  भगवान के  हरिनाम मे  शामिल  होने के लिए  कहा  जाता है  ताकि उनका  मनुष्य  जीवन व्यर्थ न हो  जाये।

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