
अच्छा ये चुनाव के दिन भी बड़े अजीब से होते हैं। जब तक मतदान नहीं हो जाता और जीत हार का जिन्न बाहर नहीं निकल आता तब तक हर कोई विजय श्री का हार अपने गले में पहने ही घूम रहा होता है और नतीजा बाहर और कई घरों के अंदर। खैर ये तो हुई मतदान और परिणाम की बात। पिछले काफी दिनों से हमने आपको बताया कि किस प्रकार आप में छिड़े घमासान को लेकर टकसारी वालंटियरों एवं नेताओं पर अन्य दलों से शामिल हुए नेता और कार्यकर्ता हावी हो चुके हैं तथा इसे लेकर वालंटियरों में किस प्रकार की चर्चाओं का बाजार गर्म है।

लालाजी स्टैलर की चुटकी
अब जबकि मतदान को मात्र यही रात बाकी बची है तो ऐसे में भी चर्चाओं का बाजार है कि थमने का नाम नहीं ले रहा। आप के सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार अब चर्चा है कि जो लोग टप्प टप्प के आप में शामिल हुए थे और उनमें से अधिकतर बूथ लगाने के सपने देख रहे थे, उनमें से अधिकतर को बूथ लगाने की जिम्मेदारी ही नहीं दी गई तथा वह जिम्मेदारी पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को सौंपे जाने से उनके रंग ढंग एक बार फिर से बदल गए हैं। क्योंकि, पाला बदलने के बाद अपने-अपने इलाके की जनता को बड़ी मुश्किल से समझाकर अपने साथ जोड़े रखने में काफी हद तक कामयाब हुए यह लोग जब बूथ पर नहीं होंगे तो लोगों में असमंजस की स्थिति को बनेगी ही और इसका सीधा असर पार्टी पक्ष के रुप में मिलने वाले जनता के फतवे पर पड़ना तय है। चर्चा है कि अब तो कई कांगरसिए जो कि अब आपिए हो चुके हैं एक दूसरे को फोन करके अपनी पीड़ा व्यक्त करके अपना दुख हलका करने में लगे हुए हैं।
दूसरी तरफ जिम्मेदारियां मिलने से गदगद हुए आप वालंटियर बूथ मिलने को अपनी जीत समझ उसे लगाने में जुटे उन्हें जिम्मेदारी सौंपने वाले नेताओं का धन्यवाद करते नहीं थक रहे। हालांकि कई स्थानों पर वालंटियरों को नाराज भी किया गया, लेकिन पता चला है कि अधिकतर बूथ पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को ही आगे रखकर दिए गए हैं ताकि 2022 की तरह ही वह काम कर सकें। भले ही बाद में क्या हो, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है, क्योंकि राजनीतिक सूत्रों के अनुसार फिलहाल मौके पर पार्टी नेताओं ने मौका संभालने वाली बात की है और कार्यकर्ता को इतना ही काफी होता है कि उसे पूछ लिया गया। अन्यथा आप समझते ही हैं कि क्या खिचड़ी पक रही है और किस प्रकार से प्र….. को झांसे में लेकर जेब भरने से लेकर चौधरदारी तक क्या-क्या चल रहा है और अधिकतर टकसाली वालंटियरों की अनदेखी से लेकर कईयों को मनाने के लिए बूथ की जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे क्या मनोरथ हो सकता है। अब तक के लिए इतना ही। अब मिलते हैं चुनाव के बाद। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।












