
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजपा आज पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो चुके सुन्दर शाम अरोड़ा के निवास स्थान पर पहुंचे। उन्होंने श्री अरोड़ा के साथ काफी समय बिताया और जब वह जाने लगे तो मीडिया से बातचीत में उन्होंने इसे सियासी मुलाकात न बताकर इसे निजी भेंट बताया। उन्होंने कहा कि श्री अरोड़ा के साथ उनके पारिवारिक संबंध हैं और गत दिवस श्री अरोड़ा की सेहत खराब होने के चलते वह खबर लेने नहीं पहुंच सके थे। इसलिए वह उनका हालचाल जानने आए थे।

श्री बाजवा का होशियारपुर में श्री अरोड़ा के निवास स्थान पर पहुंचने को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है तथा कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में श्री अरोड़ा कांग्रेस में घर वापसी कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इस संबंधी श्री अरोड़ा द्वारा कोई भी अधिकारिक तौर पर बयान या कोई ऐसी बात नहीं कही गई है, जिससे इस कयास पर मोहर लगाई जा सके। परन्तु हाल ही में चुनाव के दौरान होशियारपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली के दौरान राजनीतिक शह मात के खेल के चलते भाजपा के एक गुट द्वारा श्री अरोड़ा का नाम स्टेज पर चढ़ने वालों की लिस्ट में से कटवा दिया गया था, जिस कारण वह मोदी एवं प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के साथ स्टेज पर नज़र नहीं आए। जबकि इससे पहले हुई बड़ी रैलियों एवं कार्यक्रमों में श्री अरोड़ा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के साथ स्टेज पर नज़र आते रहे हैं। परन्तु इस बार श्री अरोड़ा को स्टेज पर न देखकर कई लोगों के मन में यह सवाल पैदा हुआ कि आखिर अरोड़ा जी को स्टेज पर क्यों नहीं चढ़ाया गया। रैली के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि अगर भाजपा का गुट श्री अरोड़ा को स्टेज पर चढ़ा देते तो हो सकता था कि इतनी सारी भीड़ उन्होंने 2027 में विधायक के रुप में स्वीकार कर लेती।
क्योंकि, वह नहीं चाहते थे कि ऐसी कोई भी आशंका पैदा हो, क्योंकि भाजपा का सबसे हावी गुट इसे कभी भी बर्दास्त नहीं करेगा कि श्री अरोड़ा उनसे आगे निकलें या पार्टी में किसी ऊंचे पद पर पहुंचे। इसके चलते ही उन्हें स्टेज से दूर रखने की योजना के तहत काम किया गया, जो सफल भी रही। इसके बाद से ही माना जाने लगा था कि श्री अरोड़ा का जिस तरह से अपमान किया गया, उससे वह घर वापसी कर सकते हैं। इस पर अब जबकि पंजाब में कांग्रेस के 7 सांसद जीतकर संसद में पहुंचे हैं तथा श्री बाजवा का उनके घर आना कोई बड़े राजनीतिक फेरबदल की तरफ इशारा करता है। भले ही दोनों नेताओं ने इसे निजी भेंट कहा, परन्तु देखना यह होता कि आने वाले समय में यह भेंट क्या रंग लाती है, या फिर यह भेंट उनके कहे अनुसार निजी भेंट ही थी।












