
नई दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के दौरे के लिए रवाना हो गए। वह रूस में 22वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वहीं, अमेरिका में नाटो समिट को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है। कहा कि मोदी के रूस दौरे का नाटो समिट से कोई मतलब नहीं है। यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद भी भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया। वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच 54 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। भारत ने रूस को सिर्फ 3.3 लाख करोड़ का निर्यात किया था। भारत के विदेश सचिव विनय मोहन ने बताया कि दोनों नेता व्यापार में असमानता के मुद्दे पर बातचीत करेंगे।

बता दें कि रूस से भारत ने 2018 में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए डील की थी। 2023 में इनकी डिलिवरी होनी थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से इसमें देरी हुई। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी पुतिन से बातचीत कर सकते हैं। वहीं, भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने और उसमें लगने वाली लागत को कम करने के लिए नए ट्रेड रूट पर भी बातचीत हो सकती है. भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट को 10 साल के लिए लीज पर लिया है। भारत इसके जरिए सेंट्रल एशिया से होते हुए रूस के साथ नए ट्रेड रूट शुरू करने को लेकर बातचीत कर सकता है। भारत इस पोर्ट की मदद से ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के साथ सीधे व्यापार कर सकता है। रूस की डिफेंस कंपनी रोस्टेक ने बताया कि उसने भारत में मैंगो मिसाइल की मैन्युफैक्चरिंग के लिए काम शुरू कर दिया है। डील के फाइनल होने के बाद भारत के सैन्य ताकत में इजाफा होगा। फिलहाल यह मुलाकात अहम हो सकती है।












