
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। बंगाल में एक डाक्टर के साथ ड्यूटी पर ही जो हैवानियत की गई उससे पूरा देश दुखी है। देश भर के डाक्टर विरोध में हैं और सबसे बड़ी बात यह कि स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया और टास्क फोर्स मंगवाने का आदेश भी दिया। बंगाल सरकार को काफी डांट डपट भी की, पर मेरा देशवासियों से यह निवेदन है कि इसी अगस्त महीने में एक दर्जन से ज्यादा ऐसी दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। चेन्नई में एक ही फर्जी एनसीसी कैंप में 11 से अधिक बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न व एक के साथ यौन शोषण हुआ। देहरादून, अमृतसर, लुधियाना, त्रिची, मुरादाबाद में ऐसी कई घटनाएं हो गईं पर देश का गुस्सा केवल बंगाल की घटना पर निकल रहा है। अन्य घटनाओं के लिए अभी समाज मौन है। दो दिन पहले ठाणे महाराष्ट्र के एक स्कूल में दो बालिकाओं के साथ ऐसा ही कुकर्म स्कूल के कर्मचारी ने किया। यद्यपि कर्मचारी गिरफ्तार हो गया, पर क्षेत्र में लोगों में ऐसा रोष पाया गया कि रेलवे ट्रैक तक जाम हो गए और पुलिस से भी संघर्ष हुआ।

मेरा यह निवेदन है कि प्रदर्शनों से और कड़े कानून बनाने से शायद समस्या का हल न निकलें हर घर की महिला को, मां, बहन, बेटी को अपने परिवार के पुरुषों से यह संकल्प लेना होगा कि उनके लिए देश की नहीं, बल्कि दुनिया की हर बेटी अपनी बेटी जैसी है और मां का रूप है। वैसे जिस देश और समाज में शादियों में शराब पिलाने के लिए, मालिश केंद्रों पर मालिश करने के लिए देशी विदेशी लड़कियों को प्रस्तुत करने का रिवाज बन जाए और डांस बार में लड़कियों को नचाकर शराब परोसने का काम लिया जाए, उस देश में वासना बढ़ेगी, इसलिए इस पर नियंत्रण किया जाए। क्या इस देश के नेता और साधु संत यह परहेज कर सकते हैं कि जिन शादियों में शराब पिलाई जाए और शराब पिलाने के लिए देशी विेशी लड़कियां लाई जाए वहां नहीं जाएंगे और सरकार भी इसकी आज्ञा न दे। केवल सख्त कानून बनाने से नहीं, बल्कि समाज को जगाने से महिलाओं के विरुद्ध अपराध कम हो सकते हैं।












