
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी शिक्षा) ललिता अरोड़ा ने कहा है कि जो अध्यापक अपनी सेवा मुक्ति के बाद बच्चों को अपने अनुभव से शिक्षा प्रदान करने के लिए आगे आते हैं वह समाज के लिए एक मिसाल का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा मुक्त अध्यापकों के पास शिक्षा विभाग से संबंधित अनुभव का एक खजाना होता है जिसका लाभ अगर बच्चों को मिले तो वार्षिक परीक्षाओं के साथ-साथ प्रतियोगितात्मक परीक्षा में भी शानदार सफलता हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल खैरड अच्छरवाल से सेवा मुक्त हुए ड्राइंग अध्यापक मोहन सिंह अपनी सेवा मुक्ति के बाद भी स्कूल के साथ पूरी तरह से जुड़े हुए हैं तथा वह हर रोज कुछ समय निकालकर बच्चों को शिक्षा प्रदान करते हैं। उनका स्कूली बच्चों के साथ रिश्ता पारिवारिक बन गया है। सेवा मुक्ति के बाद इस तरह का अनुकरणीय उदाहरण समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि अपने सेवा काल के दौरान अध्यापक ने विभाग के हर काम की बारीकियां को समझा होता है तथा उसे पता होता है कि बच्चों को किस क्षेत्र में अधिक मेहनत करवाए जाने की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि अगर दूसरे सेवा मुक्त अध्यापक भी अपने-अपने स्कूलों में इसी तरह से बच्चों के साथ जुड़कर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए अच्छी गाइडलाइन प्रदान करें तो इससे बच्चों को तो लाभ होगा ही साथ ही साथ सेवा मुक्त अध्यापक भी अपने समय का सदुपयोग कर सकेंगे। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी मैडम ललिता अरोड़ा ने सेवा मुक्त अध्यापक मोहन सिंह को सम्मानित किया। मौके पर मोनिका रानी, तमन्ना शर्मा, सुखविंदर कौर, रमनदीप कौर, सुखविंदर कौर और कमला देवी भी उपस्थित थी।












