
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। पी.सी.ए. के प्रवक्ता रमन कपूर ने बताया कि पंजाब कैमिस्ट ऐसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल जी.एस. चावला की सरपरस्ती में कमिशनर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ.डी.ए) दिलराज सिंह से चंडीगढ़ में मुलाकात की। रमन कपूर ने बताया कि पंजाब में दवा कारोबार के लिए आम दवा विक्रेताओं के लिए अलग, जबकि मल्टीनैशनल कंपनियों और कार्पोरेट घरानों के लिये अलग नियम लागू हैं। किसी आम कैमिस्ट के लिए दवा दुकान खोलने के लिए फार्मेसी की डिग्री ज़रूरी है। यही नहीं नई दवा दुकान खोलनी हो तो शहरी क्षेत्र में मौजूदा दवा दुकान से सौ मीटर व ग्रामीण में पच्चास मीटर दूरी पर होनी चाहिये लेकिन मल्टीनैशनल कंपनियों व कार्पोरेट घरानों पर यह शर्तें लागू नही होती हैं यह आम दवा विक्रेताओं के साथ अन्याय है। यह भेदभाव बन्द होना चाहिये। इस अवसर पर ऐसोसिएशन के महासचिव जी.एस. चावला, होलसेल कैमिस्ट ऐसोसिएशन लुधियाना के प्रधान अशोक डाबर लवली, पी.सी.ए. के फाइनैंस सैक्रेटरी अमरदीप सिंह, संगरूर के प्रधान नरेश जिंदल, महासचिव राजीव जैन व रोपड़ के प्रधान सुदर्शन चौधरी उपस्थित थे। मीटिंग में ड्रग कंट्रोलर संजीव गर्ग, असिस्टैंट ड्रग कंट्रोलर गुरविंदर सिंह, असिस्टैंट ड्रग कंट्रोलर अमित दुग्गल भी मौजूद रहे। इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल ने कमिशनर फूड एंड ड्रग को बताया कि थोक दवा दुकानदारों ने सिर्फ रिटेलर्स के साथ बल्क सप्लाई डील करनी होती है, इसलिए उनके वहां अनुभव पर आधारित कंपीटैंट पर्सन को मन्ज़ूरी मिलनी चाहिये।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्रधानमन्त्री जनऔषधि केन्द्रों की नियमित चैकिंग की जाये तांकि जनऔषधि केन्द्रों में दूसरी दवाओं की बिक्री रोकी जाए तांकि वहां पर जनऔषधि इलावा कोई अन्य दवाएं न बेची जाएं। उन्होंने बताया कि जब ऑनलाइन रिन्यूवल शुरू हुई थी, तब कहा गया था कि जगह, कंपीटैंट पर्सन या कॉस्टीट्यूशन चेंज के इलावा किसी स्थिति में अन्य दस्तावेज नहीं मांगे जायेंगे और सिर्फ फीस भरकर रिन्यूवल हो जायेगी लेकिन इसके बावजूद रिन्यूवल के आम केसों में भी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। विभाग के पास दस्तावेज पहले ही जमा हो चुके हैं तो उनसे रिन्यूवल के वक्त यह दस्तावेज दोबारा न मांगे जायें। इससे ऑनलाइन रिन्यूवल की प्रक्रिया सरल हो जायेगी। शिष्टमंडल ने मांग की कि थोक दवा मार्कीटों में रिटेल लाईसैंस न जारी किये जाये। इसके इलावा नई पॉलिसी में 2021 से पहले की ड्रग लाइसैंस शिफ्टिंग की पॉलिसी को मंजूरी दी जाये। दवा दूकानो पर शैड्यूल एच के मैनुअल रजिस्टर को लाज़मी न किया जाये।












