Saturday, October 31, 2026
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गीता में लिखा है कि अपने धर्म के लिए मर जाना भी अच्छा हैः आचार्य चंद्र मोहन

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में रविवार के प्रवचन के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि हम में ज्ञान की बहुत कमी है क्योंकि हम शास्त्रों का पठन नहीं करते। हम ज्ञान का लाभ नहीं उठाते। आज के जो युवा भक्त हैं उनमें भक्ति की रुचि कम ही पैदा हो रही है। वे ऐसे खेत हैं जिसमें बीज न डाला गया हो। हमारा समाज खोखला होता जा रहा है। पहले लोगों को धर्म पढ़ाया जाता था, भारत धर्म परायण देश था। शंकराचार्य जी के आगे कोई शास्त्रार्थ नहीं कर सकता था।  स्वामी दयानंद राजा राममोहन राय ने धर्म का प्रचार किया। उसके बाद मैकाले आ गया।

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उसने एक ऐसा बीज समाज में डाल दिया जो हमारे समाज को गलत दिशा की और ले जा रहा है। हमारी भाषा के प्रति आस्था नहीं रही, ना धर्म के प्रति आस्था रही है। किसी जाति की शक्ति मानसिक शक्ति होती है। अपने धर्म पर दृढ़ विश्वास होना आज धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। प्राचीन काल में ऐसा नहीं था। उस समय धर्म और योग की शिक्षा दी जाती थी। भौतिक विकास किया जाता था। उनका पहला पाठ होता था धर्म पर अटल रहो। गीता में लिखा है कि अपने धर्म के लिए मर जाना भी अच्छा है। संसार के सारे काम वचन पर होते थे। लिखा परत नहीं की जाती थी। आज समाज में स्थिरता नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्चों को योग सिखाओ। आज हम अपनी भाषा को भी अच्छा नहीं समझते

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