
पिछले कुछ समय से एक सरकारी सामाजिक संस्था जो जनता द्वारा दिए दान की राशि से चलती है में फैले कथित भ्रष्टाचार एवं जी हजूरी के माध्यम से दान की राशि के गबन संबंधी मामला प्रकाश में आया था। हालांकि हमने संस्था का नाम नहीं लिखा था, लेकिन इस मामले में राहत इंदौरी जी के वाक्य चरितार्थ हुए और संस्था वालों ने खुद ही अपना नाम जहजाहिर कर दिया। इतना ही नहीं संस्था से जुड़े कुछेक सदस्यों ने इस संबंधी अधिकारियों से बात करने उपरांत जब कुछ नहीं हुआ तो एक नेता जी को सारी बात बताने के बाद कुछ करने को कहा।

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उन्होंने भी सोचा कि शायद उनके फोन करने से काम हो जाएगा, लेकिन उन्हें शायद पता नहीं था कि यह फैवीकोल का मजबूत जोड़ है, ऐसे नहीं छूटेगा। उनके फोन का असर तो नहीं हुआ, लेकिन पता चला है कि अंदरखाते मामला काफी हद तक सैट करने में कथित भ्रष्टाचारियों को काफी कामयाबी मिल चुकी है तथा अपने किए काले कारनामों को छिपाने के लिए वह हर तिकड़म भिड़ाने का कोई रास्ता नहीं छोड़ रहे। वैसे भी सूत्रों की माने तो उनके अनुसार जब तक अधिकारी वर्ग का साथ है तब तक उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। एक बात है उनका बिगड़ेगा भी कैसे, क्योंकि बहुत सारे अधिकारी जब अपनी मनपसंद जगह पर थोड़ी थकान उतारने जाते हैं तो उनके द्वारा उठाए गए आनंद की पर्ची का भुगतान जो उनके द्वारा कर दिया जाता है। ऐसे में कमाऊ और जीहजूरी में माहिर चाटूकारों को कौन दूर करना चाहेगा। अब पता चला है कि नेता जी इस बात से नाराज हैं कि उनके द्वारा फोन किए जाने के बावजूद कार्यवाही न होने से उनकी खासी फजीहत हो रही है तथा उनकी पहुंच और ऊंचे कद पर भी लोग शक करने लगे हैं कि आखिर उन्होंने फोन दिखावे के लिए किया या फिर वह सच में इस संस्था में कुछ सुधार चाहते हैं। नहीं तो ऐसा नहीं होता कि वह किसी सामर्थ अधिकारी को फोन करें और वह एक्शन न ले।
दान की राशि को अपने सुख सुविधा के लिए प्रयोग करने की चर्चाओं से दानी सज्जनों की सूची में भी कमी रिकार्ड की जाने लगी है तथा कुछेक सदस्यों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब वह जब किसी को संस्था से जुड़ने या दान के लिए कहते हैं तो उसके द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का उनके पास कोई जवाब नहीं होता। एक तरफ गैर सरकारी संस्थाएं उक्त संस्था से बेहतर काम करके सामाज में अपनी छवि स्थापित कर रही हैं और दूसरी तरफ बनी बनाई छवि को बिगाड़ने के लिए चाटूकारिता का पहाड़ा हावी हो रहा है। इतना ही नहीं इस संस्था से जुड़े एक बड़े नेता जी भी खामोशी धारण किए सारा खेल खुली आंखों से देख रहे हैं। जबकि उनका रिकार्ड रहा है कि जरा-जरा सी बात पर कार्यवाही हेतु चिट्ठियां लिखने में माहिर नेता जी ही बता पाएंगे कि उन्होंने इस मामले का अभी तक संज्ञान क्यों नहीं किया। खैर यह तो कही उनकी बात, वह जानें। पर इस समय सत्ताधारी नेता जी की साख को बट्टा लगता नज़र आ रहा है कि उनके फोन का आखिर असर क्यों नहीं हुआ। अब तो देखना यह होगा कि इस कथित भ्रष्टाचार से पर्दा उठता है या फिर इसे पर्दे से ढक दिया जाता है। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।












