Monday, October 19, 2026
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सरहद के सपूतों को रक्षाबंधन का उपहार, टौणी देवी की गाइड्स की भावनात्मक पहल

हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-रजनीश शर्मा। रक्षाबंधन पर्व का यह वर्ष राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी की गाइड्स छात्राओं के लिए केवल एक पारंपरिक त्यौहार नहीं, बल्कि देशभक्ति और भावनात्मक समर्पण की एक अनोखी पहल बन गया है। इस बार गाइड्स छात्राओं ने सरहद पर तैनात अपने वीर भाइयों को राखियाँ, ग्रीटिंग कार्ड और आत्मीय संदेश भेजने का निर्णय लिया है। लेकिन इस वर्ष यह प्रयास और भी गहराई लिए हुए है क्योंकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पूरे देश में सैनिकों के प्रति एक नई संवेदना और सम्मान की लहर उठी है। ज्ञात हो कि हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर, जिसमें भारतीय सेना ने आतंक के मुँहतोड़ जवाब के साथ-साथ सीमा पर कई गुप्त ठिकानों को नष्ट कर राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूती दी, ने देश को झकझोर कर रख दिया।

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इस अभियान में कई वीर जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और कुछ ने अपने प्राणों का बलिदान भी दिया। ऐसे में यह रक्षाबंधन केवल रक्षा-सूत्र का पर्व नहीं, बल्कि सैनिकों के बलिदान को कृतज्ञता पूर्वक नमन करने का अवसर भी बन गया है। इसी भावना को जीवंत करते हुए, टौणी देवी की गाइड्स छात्राओं ने गाइड कैप्टन कुसुम लता के मार्गदर्शन में 50  राखियाँ, ग्रीटिंग कार्ड और पत्र तैयार किए हैं। हर एक राखी के साथ एक बहन का स्नेह, एक माँ की चिंता, एक बेटी का गर्व और एक पत्नी की प्रार्थना जुड़ी हुई है। इन ग्रीटिंग कार्डों में सिर्फ रंग और सजावट नहीं, बल्कि उन दिलों की धड़कनें हैं, जो हर दिन अपने सैनिक बेटे या भाई की सलामती के लिए दुआ करती हैं।

प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने बताया कि हमारी छात्राओं ने इस पर्व को एक राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना से अपनाया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश भर में एक भावनात्मक चेतना आई है। आज हर बहन चाहती है कि उसका राखी-संदेश किसी सैनिक भाई तक पहुंचे। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारी गाइड्स बेटियाँ इस चेतना को आकार दे रही हैं। छात्राओं ने इस कार्य को सिर्फ एक शैक्षणिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि दिल से एक सेवा भावना के रूप में लिया है। “हर धागा, हर शब्द  एक बहन की ओर से अपने उस भाई के लिए है, जो हमें देखे बिना, बिना थके, हमारी सुरक्षा के लिए मोर्चे पर खड़ा है,” उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब विद्यार्थियों का हृदय देश के प्रति धड़कने लगे, जब वे संवेदनशील, जिम्मेदार और जागरूक बनें  तभी हम सच्चे अर्थों में शिक्षित पीढ़ी गढ़ पाएँगे।

गाइड कैप्टन  ने भावुक होते हुए कहा कि हमारी बेटियों ने केवल राखी नहीं बनाई, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक पुल रचा है, जो हिमालय से ऊँचा और सरहदों से परे है। यह उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटियों की ओर से एक श्रद्धांजलि है  उन जवानों के लिए जो ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में हर दिन अपनी जान दांव पर लगाते हैं छात्रा श्रेया ने बताया, “जब मैंने कार्ड में लिखा  ‘आप ज़िंदा हैं, तभी हम महफूज़ हैं’ तो मेरी आँखें छलक आईं। वहीँ चेतना और प्रियांशु ने बताया कि हमने  पहली बार किसी फ़ौजी भाई के लिए राखी बनाई है। जब संदेश लिख रही थी, तो मेरी आँखें भर आईं। ऐसा लग रहा था जैसे वह भाई मेरे सामने बैठा है। कार्यक्रम के समापन पर सभी तैयार की गई राखियों, ग्रीटिंग कार्डों और संदेशों को विधिवत एकत्र कर भारतीय सेना के लेह स्थित कैंप से आगे गलवान घाटी में भेजे जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

यह स्थान ऑपरेशन सिंदूर के केंद्रों में से एक रहा है, और वहीं पर इन राखियों का पहुँचना एक गहरे भावनात्मक प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। टौणी देवी की गाइड्स की यह पहल एक अनूठा सामाजिक-सांस्कृतिक संदेश है  कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, देश की बेटियाँ अपने सैनिक भाइयों को कभी अकेला नहीं छोड़तीं। उनके लिए यह राखी केवल रक्षासूत्र नहीं, बल्कि संवेदना, सम्मान और एक राष्ट्र का आभार है उन वीरों के लिए जो हमारे आज और कल को सुरक्षित करते हैं।

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