Monday, October 12, 2026
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शरीर और मन शुद्ध होंगे तो इंद्रियां वश में रहेंगी: चंद्र मोहन

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में रविवार के सत्संग के दौरान प्रवचन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन ने कहा कि योग ही धर्म है। मनु महाराज ने धर्म।के जो लक्षण बताए है वहीं नियम है। योग में वही 5 यम और 5 नियम है। अगर हम धर्म की रक्षा नहीं करेंगे तो धर्म हमारी रक्षा नहीं करेगा। हमारे शास्त्रों के अंदर अलंकारिक रूप से बहुत कुछ समझाया गया है। शिव जी महाराज की तस्वीर बनाकर बताया गया है कि योगी का स्वरूप कैसा होता है। योगी का स्वरुप वह होता है जिसके मस्तिष्क में उजाला हो इसीलिए वहां पर चंद्रमा बनाया गया है। योग से ज्ञान की उत्पत्ति होती है। योगी अपने पास संचय नहीं करता। हमारे योग के यम नियमों का भी अलंकार स्वरूप बनाया गया है जैसे एक बैल बताया गया है जिसके सींगों पर दुनिया खड़ी है।

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कहते हैं अगर यह बैल हिल जाए तो दुनिया हिल जाती है। इसका मतलब यह है कि अगर धर्म हिल जाए तो दुनिया हिल जाएगी। दो सींग है यम नियम।  यम का पहला तत्व अहिंसा तथा नियम का शौच है। यही दो सींग है। अगर अहिंसा का सींग हिल गया तो मार काट शुरू हो जाएगी लोग एक दूसरे को मार देंगे। आज सींग टेडा हो रहा है। इस लिए हत्याएं बढ़ रही है। अगर अहिंसा समाप्त हो गई तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा। मीलों पर कोई कोई दीपक दिखाई देगा। इसीलिए अहिंसा को परमो धर्म कहा गया है। दूसरा नियम शौच का है। यह गड़बड़ा गया तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा। विकसित देश भी आकाश में फैल रही गैसों के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। योग दर्शन कहता है कि शौच से लोक और परलोक दोनों सुधरते हैं। लेकिन हमने शौच को छुआछूत में बदल दिया। शौच हमारे तन मन और बुद्धि को शुद्ध करने वाला है।

शौच का पहला गुण यह है कि इस से हमारा शरीर शुद्ध होता है। निरंतर हठ योग करने वाले को कोई बीमारी नहीं लगती। शरीर को शुद्ध नहीं करेंगे तो उसका बिगड़ना तय है। इससे बाहर से आने वाले रोग भी नहीं लगता। इसके अतिरिक्त मन की शुद्धि की तरफ भी ध्यान दें। शरीर को बीमार होने में तो समय लगता है लेकिन मन पर कोई विकृति आ जाए तो इसके खराब होने में समय नहीं लगता। हम ऐसी कोई बात ना करें जिससे मन के ऊपर कोई अशुद्धि विचार आए। अगर मन शुद्ध नहीं होगा तो ध्यान में बैठने पर इधर-उधर भाग जाएगा। इसके अतिरिक्त हमें इंद्रियों को वश में रखना होगा। शरीर और मन शुद्ध होंगे तो इंद्रियां वश में रहेंगी। मन शुद्ध होगा तो हम आत्मा के दर्शन कर सकेंगे।

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