
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़), संदीप डोगरा। जल स्रोत विभाग द्वारा जारी की गई एक चिट्ठी की शहर में काफी चर्चा है। चिट्ठी में निर्देश जारी किए गए हैं कि श्री राम लीला मैदान में किसी भी कार्यक्रम के लिए अब रोज का रैंट देना पड़ेगा और वह भी 25 हजार रुपये एक दिन का। विभाग द्वारा निकाली गई इस चिट्ठी को कई लोग एक कामेडी की तरह भी देख रहे हैं कि विभाग ने क्या मजाक किया है। अब आप भी सोच रहे होंगे कि मजाक कैसे। यह मजाक नहीं तो और क्या है। क्योंकि, जिस स्थान पर श्री राम लीला मैदान बना हुआ है वह सार्वजनिक जगह नहीं है बल्कि मालकी है, यानि कि उस जगह के असली मालिक मरवाहें हैं और उनके नाम से वह जगह बोलती है। बाकायदा तौर पर उनके पास फर्दें हैं।

इसलिए मालिक किराये के लिए बोलें तो समझ आता है, लेकिन जिस विभाग का वहां लेना देना ही कुछ नहीं या उसे विकसित करने में कोई योगदान ही नहीं तो वह किस हैसियत से रैंट मांग रहे हैं। विभाग द्वारा जारी चिट्ठी के बाद हालांकि इसे जजिया कहकर इसका विरोध होना भी शुरु हो चुका है। लेकिन हैरानी तो इस बात की है कि कोई व्यक्ति या विभाग अपनी जगह का रैंट तो मांग सकता है, लेकिन किसी दूसरे की जगह पर हक कैसे जमा सकता है। मरवाहा बिरादरी का कहना है कि विभाग की इस हरकत को लेकर सभी मरवाहे सकते में हैं कि उन्होंने धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए जगह एक तरह से खाली छोड़ी हुई है और उन्होंने कभी किराये आदि संबंधी सोचा ही नहीं। नियमानुसार चोअ में वह निर्माण तो नहीं कर सकते, लेकिन कृषि करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता।
मगर, बरसों यहां पर धार्मिक कार्य होते आए हैं और उनके बुजुर्गों ने जगह को खाली छोड़ा हुआ था। उन्हें दुख है कि जल स्रोत विभाग ने यह कदम उठाया। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं से कहा कि सभी मरवाहे शहर के साथ हैं और अगर विभाग ने धक्का करने का प्रयास किया तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो वह इसकी निशानदेही करवाकर तारों से उसे कवर करवा देंगे तथा उनकी जमीन में आने के लिए विभाग को भी आज्ञा लेनी पड़ेगी, पर वह शहर के साथ किसी भी तरह की धक्केशाही नहीं होने देंगे। इतना ही नहीं समस्त मरवाहा बिरादरी के लोगों ने कहा कि अगर स्थिति यही रहती है तो वह अपनी जमीन वापिस ले लेंगे।












