Sunday, October 11, 2026
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रूस-यूक्रेन युद्ध से जिंदा लौटे युवक ने सुनाई दिल दहला देने वाली आपबीती

जालंधर (द स्टैलर न्यूज़)। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान गोलियों की बरसात से जान बचाकर लौटे पंजाब के युवक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाओं का खुलासा किया। अप्रैल 2024 में रूस गए युवक सरबजीत सिंह ने बताया कि सिर्फ दो हफ्तों की फौजी ट्रेनिंग के बाद उसे सीधे यूक्रेन बॉर्डर पर जंग लड़ने भेज दिया गया। सरबजीत ने कहा कि अगर राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल मदद न करते, तो शायद उनकी लाशें भी कभी घर नहीं लौट पातीं। सरबजीत ने उनका धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके माता-पिता मानते हैं कि उनका बेटा जैसे दोबारा जन्म लेकर लौटा है।

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अब यह युवक रूस में लापता 14 भारतीयों की तलाश में फिर मास्को जा रहा है, ताकि वह फौजी कैंपों से उनकी पहचान कर सके। सरबजीत सिंह वहां 8 महीने से ज्यादा वक्त बिता चुका है और उसे कई शहरों की जानकारी है। उसने बताया कि वह और कुल 18 लोग कोरियर का काम करने के लिए मास्को गए थे। लेकिन एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें काबू कर लिया गया और एक इमारत में ले जाया गया। वहां दस्तावेज तैयार करवाने और मेडिकल चेकअप के बाद 15 दिन की फौजी ट्रेनिंग दी गई और फिर सीधे रूस-यूक्रेन जंग में उतार दिया गया, जिससे उनका कोई लेना-देना नहीं था।

वहां कभी गाड़ियों में ले जाते थे, तो कभी कई-कई किलोमीटर पैदल चलाया जाता था। पांच-पांच लोगों की टीमें बनाकर उन्हें फौजी वर्दी पहनाकर असली हथियारों से लैस कर दिया गया। सरबजीत ने बताया कि जब वे यूक्रेन में आगे बढ़ते थे, तो चारों तरफ सिर्फ लाशें ही लाशें नजर आती थीं। इन लाशों में कई भारतीय भी थे और अलग-अलग देशों के नौजवानों की भी लाशें थीं।

सरबजीत ने बताया कि कई-कई दिन तक पीने का पानी भी नसीब नहीं होता था और समय पर खाना भी नहीं मिलता था। एक बार तो वह इतना टूट गया कि उसने हैंड ग्रेनेड की पिन निकालकर खुद को खत्म करने की भी कोशिश की। उसने बताया कि वहां जंग के माहौल में पता ही नहीं चलता था कि कहां से गोली या बम आ गिरेगा। सरबजीत ने कहा कि उसने पहली बार जिंदगी में मौत को इतना करीब से देखा।

संत सीचेवाल ने बताया कि उन्होंने चल रहे मानसून सत्र के दौरान रूस में फंसे इन भारतीयों की मदद के लिए हर संभव प्रयास किए हैं और सरकार से भी इनकी सहायता की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को पूछे गए सवाल के जरिए बताया गया था कि रूस की आर्मी में 13 भारतीयों में से अभी भी 12 लापता हैं। उनकी तलाश के लिए मंत्रालय प्रयास कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह रूस में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे।

उल्लेखनीय है कि संत सीचेवाल ने बीते फरवरी में दो लोगों को रूस जाने के लिए टिकटें भी उपलब्ध करवाई थीं, ताकि वे अपने परिजनों की तलाश कर सकें। मास्को स्थित भारतीय दूतावास को भी इन परिवारों की मदद के लिए पत्र लिखा गया है।

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