
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। भारत ने लिवरपूल में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2025 में दो स्वर्ण पदक सहित कुल चार पदक अपने नाम किए है। जैस्मिन लैम्बोरिया 57 किलोग्राम और मीनाक्षी हुड्डा 48 किलोग्राम में विश्व चैंपियन बनी, जबकि नुपूर श्योराण ने 80+ किलोग्राम में रजत और ओलंपियन पूजा रानी ने 80 किलोग्राम में कांस्य पदक जीता।

जैस्मिन हरियाणा के भिवानी जिले की रहने वाली है। उनके पिता जयवीर लंबोरिया होमगार्ड की नौकरी करते हैं और मां एक गृहिणी हैं, उनके चाचा संदीप और परविंदर दोनों ही बॉक्सर रहे हैं, और उनके परदादा हवा सिंह तो भारत के दिग्गज हेवीवेट मुक्केबाज थे। उन्होंने एशियाई खेलों में दो बार गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।
वहीं, मीनाक्षी ने फाइनल में कई बार की वर्ल्ड गोल्ड मेडलिस्ट विनर और पेरिस ओलंपिक की कांस्य विजेता नाजिम काइजेबे को हराकर गोल्ड मेडल जीता। मीनाक्षी ने इस मैच में नाजिम काइजेबे को 4-1 से मात दी। इस खास मौके पर कोच विजय हुड्डा ने मीनाक्षी के बधाई देते हुए बताया कि मीनाक्षी जिले के गांव रुड़की गांव की रहने वाली हैं। इस अवसर पर मीनाक्षी के पिता ने बताया कि वह बेटी के बॉक्सर बनने के खिलाफ थे। उन्हें समाज का डर था। लोग ताना देते थे कि बिटिया से शादी कौन करेगा? मीनाक्षी के पिता कृष्ण ने बताया- प्रधानमंत्री ने बेटी को बधाई दी, जिस पर मुझे गर्व है। मेरे 4 बच्चे हैं, जिनमें 3 बेटियां हैं। मैं किराए का ऑटो चलाता था और आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि बड़ी मुश्किल से गुजारा होता था। मैं बिटिया की ट्रेनिंग का पैसा अफोर्ड नहीं कर सकता था। लोग मुझसे कहते थे कि बॉक्सिंग करने से उसका चेहरा खराब हो जाएगा। उससे कोई शादी नहीं करेगा। उन्होंनें कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।
नुपूर श्योराण कैप्टन हवा सिंह की पौत्री हैं। नुपूर के रूप में कैप्टन हवा सिंह की तीसरी पीढ़ी बॉक्सिंग खेल में देश का नाम रोशन कर रही है। नुपूर श्योराण ने अपनी जीत का श्रेय अपने पिता व कोच संजय श्योराण को दिया है। नुपूर श्योराण ने फाइनल कजाकिस्तान की मुक्केबाज को हराया है।
अपने पिता को चुनौती देने से लेकर अपने सपनों को पूरा करते हुए ओलंपियन बनने तक, पूजा रानी का सफर काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा है। पूजा रानी के पिता अपनी बेटी के बॉक्सर बनने के सख्त खिलाफ थे। पूजा रानी को अपने पिता की ऊंची आवाज में दी गई चेतावनी आज भी अच्छी तरह याद है। उन्होंने उनसे कहा था, “अच्छे बच्चे बॉक्सिंग नहीं खेलते हैं।” लेकिन उन्होंने अपने शहर में प्रसिद्ध हवा सिंह बॉक्सिंग अकादमी जाना शुरू कर दिया और वहां अपने पिता से छिपते हुए प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। शुरुआती दिनों में पूजा रानी अपने कोच के घर पर ही रहकर मुकाबलों के दौरान लगी चोटों को छिपाती थीं, जबकि उनके माता-पिता को लगता था कि वह अपने दोस्तों के घर पर है। पूजा रानी के पिता उस समय हरियाणा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर थे और उन्होंने जल्द ही अपनी बेटी के इस राज को पकड़कर कार्रवाई करने का फैसला किया। पूजा रानी के बॉक्सिंग भविष्य को खतरे में देखकर उनके कोच संजय कुमार श्योराण ने इस मामले में दखल दिया। श्योराण के समझाने पर उनके पिता ने पूजा को अपनी योग्यता साबित करने के लिए एक मौका दिया और हरियाणा की इस बॉक्सर ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया। पूजा हरियाणा सरकार में आयकर अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।












