Friday, October 30, 2026
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रोस्टर जारी नहीं हुआ पंचायत और शहरी निकाय चुनावों की तैयारियां तेज, 20 करोड़ होगा खर्च, 35 हजार कर्मचारीं देंगे ड्यूटी

हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-रजनीश शर्मा। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के लिए बेशक अभी रोस्टर जारी नहीं हुआ है लेकिन तैयारियां फिर भी जोरों पर शुरू हो  चुकी है। गांव की गलियों से लेकर दुकानों तक नए पंचायत प्रधान के दावेदारों की खुसर फुसर शुरू हो चुकी है। कुछ दावेदारों ने तो प्रचार भी शुरू कर दिया है। शहरी निकाय चुनावों के लिए भी दावेदारों की लिस्ट तैयार हो रही हैं। 

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चुनाव आयोजन के लिए 20 करोड़ रुपए खर्च अनुमानित

राज्य चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करवाने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान लगाया है। यह खर्चा बैलेट पेपर के प्रिंटिंग स्टेशनरी और कर्मचारियों के टीए डीए को लेकर है। इन चुनावों में करीब 35 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने में अपना योगदान देंगे। राज्य चुनाव आयोग में इन चुनावों के लिए 3 करोड़ बैलेट पेपर के प्रिंटिंग के ऑर्डर दिए हैं।

वोटर लिस्ट फाइनल करने की तैयारी

चुनाव आयोग इस समय वोटर लिस्ट के प्रारूप को अंतिम रूप देने में जुटा है। बताया जा रहा है कि अगले दो दिनों में मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जा सकता है। राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में 20 से 26 सितंबर के बीच हुई ग्राम सभा की बैठकों में वोटर लिस्ट की वेरीफिकेशन पूरी कर ली गई है। इसमें मृतकों, स्थानांतरित व्यक्तियों और विवाह के बाद अन्य पंचायत में स्थानांतरित महिलाओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

दिसंबर में होने हैं चुनाव 

प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं की तीन स्तरीय प्रणाली ग्राम पंचायत, ब्लाक समिति और जिला परिषद के चुनाव जनवरी से पूर्व होने हैं। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियों को तेज किया है। मतदाता सूचियों को अपडेट करने के अलावा विशेष ग्रामसभाएं भी हो रही हैं, जिसमें मतदाता सूचियों को रखा गया है।  

12 जिला परिषद, 91 ब्लाक समिति और 3577 पंचायतों में होंगे चुनाव

प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के तहत 12 जिला परिषद के 249 सदस्यों का चुनाव होना है। वहीं, 91 ब्लाक समितियों के सदस्यों और 3577 पंचायतों के प्रधान, उपप्रधान और वार्ड पंच के चुनाव होने हैं। पहले पंचायतों की संख्या 3615 थी, नए नगर निगमों और नगर परिषद व नगर पंचायतों के गठन से पंचायतों का विलय हुआ, जिस कारण अब यह संख्या 3577 रह गई है। प्रदेश की पंचायतों में सात से 10 तक वार्ड बने हुए हैं।

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