
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। बीती शाम दिल्ली के लाल किले नजदीक हुए धमाके ने पूरे देश को दहला कर रख दिया। पुलिस द्वारा विभिन्न एंगलों से जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच के अनुसार जिस सफेद रंग की आई20 कार में विस्फोट हुआ, एक साल में उसके सात मालिक बदल गए, लेकिन यह कार दूसरे खरीदार के नाम पर ही रही और यही कार अब इस आतंकी साजिश की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार जांच के घेरे में HR26CE7674 नंबर की कार को लिया गया। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि यह गाड़ी 2013 में बनी थी और 2014 में गुरुग्राम निवासी सलमान के नाम पर पंजीकृत हुई थी। दस्तावेजों में सलमान कार का दूसरा मालिक बताया गया। इसके बाद पुलिस की टीम ने सलमान से संपर्क साधा। सलमान ने पुलिस को बताया कि उसने यह कार ओखला निवासी देवेंद्र को बेची। देवेंद्र ने आगे यह गाड़ी अंबाला के एक व्यक्ति को बेच दी, जिसने बाद में इसे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी आमिर को सौंप दी।

आमिर के बाद यह कार फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉ. मुजम्मिल शकील से होते हुए डॉ. उमर मोहम्मद तक पहुंची। जांच में जो सबसे खास बात पता चली है, वो ये है कि यह कार कम से कम सात लोगों में हाथ में गई, लेकिन कागजों में इसका मालिक सलमान ही बना रहा। यानी इतने मालिक बदलने के बावजूद कार का रजिस्ट्रेशन सलमान के नाम पर ही रहा। यही बात सुरक्षा एजेंसियों की जांच को जटिल बना रही है। दूसरी ओर, विशेषज्ञों के मुताबिक सेकेंड हैंड वाहन कारोबार में यह आम बात है। कई बार खरीदार रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं कराते। ताकि टैक्स और कागजी प्रक्रिया से बचा जा सके। यही लापरवाही आपराधिक तत्वों के लिए मौका बन जाती है, क्योंकि ऐसी गाड़ियों का असली मालिक ढूंढना मुश्किल हो जाता है। सीसीटीवी की जांच करते हुए पुलिस को एक और अहम जानकारी मिली।
जांचकर्ताओं के अनुसार यह कार फरीदाबाद से दिल्ली आई, बदपुर बॉर्डर पार करके आईटीओ, सराय काले खां होते हुए लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास पहुंची। सीसीटीवी फुटेज के मुताबक यह कार दोपहर 3:19 बजे एक मस्जिद के पास पार्किंग में दाखिल होती है और अगले तीन घंटे तक वहीं खड़ी रहती है। इसमें हैरानी वाली बात यह है कि इस दौरान ड्राइवर ने गाड़ी के बाहर कदम भी नहीं रखा। इस बाद शाम 6:48 बजे कार पार्किंग से निकली और नेताजी सुभाष मार्ग के ट्रैफिक सिग्नल तक पहुंची और 6:52 बजे, इसमें जोरदार धमाका हुआ। जिस कारण आसपास के वाहन भी इसकी चपेट में आ गए। सुरक्षा एजेंसियां प्रथम दृष्टया कार में बैठे व्यक्ति को डा. उमर मान रही है।
इसके साथ ही अब यह पता लगाने की कोशिश जा रही है कि क्या कार में बैठे व्यक्ति ने खुद विस्फोट किया, जिसमें वह मारा गया या फिर यह रिमोट-ट्रिगर किया गया विस्फोट था। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह आईईडी था। एनएसजी और फॉरेंसिक विशेषज्ञ विस्फोट स्थल से मिले अवशेषों का रासायनिक विश्लेषण कर रहे हैं। दूसरी ओर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, अंबाला और पुलवामा में पुलिस व खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। स्थानीय पुलिस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।












