
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। सरकारी एलिमेंट्री/मिडिल स्कूल चक्क फुल्लू में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए सरबत दा भला वेलफेयर सोसायटी (एनआरआई) निरंतर एक मिसाल कायम कर रही है। सोसायटी और गांव के सभी सदस्यों के सहयोग से स्कूल की नई बिल्डिंग का निर्माण पूरा किया गया, जिसमें एनआरआई समुदाय का विशेष योगदान रहा। स्कूल से जुड़े कई प्रबंधकीय और विकास कार्य सोसायटी द्वारा उत्साहपूर्वक निभाए जा रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से भी एलिमेंट्री ब्लॉक में एक कक्ष का निर्माण कराया गया है।

स्कूल को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिए सोसायटी ने अब तक करीब 50 लाख रुपये का योगदान किया है। इस राशि से स्कूल की चारदीवारी, स्मार्ट क्लासरूम, कैंपस में इंटरलॉक टाइलें, स्टेज, नए कमरे और अन्य बुनियादी सुविधाएँ तैयार की गई हैं। इन सभी प्रयासों ने स्कूल का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है और बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार हुआ है।
इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण योगदान स्वर्गीय स. अमर सिंह जी (इंग्लैंड) के पुत्र स. मनजीत सिंह जी (इंग्लैंड) ने दिया है। उन्होंने स्कूल के बच्चों के लिए इंग्लैंड से आठ लैपटॉप दान किए, जो ग्रामीण छात्रों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए ये लैपटॉप आधुनिक तकनीक से सीखने का सुनहरा अवसर प्रदान करेंगे। पिछले वर्ष भी उनका यह प्रयास किया गया था, लेकिन पोस्टल कारणों के चलते लैपटॉप स्कूल तक नहीं पहुँच पाए। इसके बावजूद स. मनजीत सिंह जी ने हिम्मत नहीं हारी और इस वर्ष अपनी कोशिश को सफल बनाया। सोसायटी के सभी कार्यों में उनका लगातार योगदान अत्यंत सराहनीय है।
लैपटॉप लाने में सहयोग देने वाले सदस्यों का भी सोसायटी की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से स. अमरजीत सिंह जी (इंग्लैंड) पुत्र स्व. स. गुरदियाल सिंह जी शामिल हैं, जिन्होंने उपकरणों को लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा श्रीमती सुरजीत कौर राय, पत्नी स. कुलदीप सिंह राय (इंग्लैंड) तथा श्रीमती इंद्रजीत कौर सिंधू, पत्नी स. मनजीत सिंह सिंधू ने भी पूरे सहयोग से इस कार्य को सफल बनाया।
सोसायटी ने कहा कि एनआरआई समुदाय के सहयोग से चक्क फुल्लू स्कूल आज आधुनिक शिक्षा का मॉडल बनता जा रहा है। यह पहल गांव के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। सोसायटी ने सभी परिवारों के लिए वाहिगुरु से चढ़दी कला की अरदास की।












