
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़), पलक। राष्ट्रपति मूर्मू ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी की वीबी-जी राम जी बिल को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद अब यह कानून बन गया है। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर अब एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन कर दिया गया है। सरकार इसे ग्रामीण जीवन को मजबूत आधार देने वाला ऐतिहासिक कदम बता रही है।

आखिर विकसित भारत रोजगार गारंटी विधेयक और मनरेगा में क्या फर्क है..
नए विधेयक के तहत हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा। सरकार का तर्क है कि इससे न सिर्फ 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार होगा, बल्कि गांवो का समग्र विकास भी संभव होगा। वहीं, मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती थी।
विकसित भारत रोजगार गारंटी योजना में फंडिंग में बदलाव किया गया है। मनरेगा में जहां अधिकतर खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, वहीं नई योजना में राज्यों को भी अपने हिस्से का योगदान देना होगा। फंडिंग का अनुपात 60:40 रखा गया है, यानी कि 60 प्रतिशत खर्च केंद्र और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार करेगी। यहीं नहीं, जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं हैं, वहां योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। इस विधेयक के तरत किसानों को खेतों में मजदूर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। योजना में प्रावधान है कि बुवाई और कटाई के मौसम में 60 दिनों का अलग समय निर्धारित किया जाएगा, जिसमें मनरेगा के तहत काम नहीं दिया जाएगा।
मनरेगा में 15 दिनों के भीतर मजदूरी देने का प्रावधान था। वहीं नई योजना के तहत मजदूरों को अब हर हफ्ते भुगतान किया जाएगा। यदि तय समय के भीतर मजदूरी नहीं मिलती है, तो मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा।












