
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। बीबीएमबी तलवाड़ा के मुख्य इंजीनियर राकेश गुप्ता के निर्देशों के अनुसार बीबीएमबी अस्पताल द्वारा चलाए जा रहे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के तहत अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनाहित ने बताया कि 8 से 14 मार्च तक “ग्लूकोमा-मुक्त संसार के लिए एकता” स्लोगन के तहत विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस ग्लूकोमा सप्ताह को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को काले मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) और आंखों की बीमारियों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि भारत में ग्लूकोमा स्थायी अंधत्व के मुख्य कारणों में से एक है। यदि इसका समय पर पता लगाकर इलाज किया जाए तो इसका सफल उपचार संभव है। ऑपरेशन के माध्यम से नजर को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कभी भी झोलाछाप या नीम-हकीमों से दवा लेकर आंखों में नहीं डालनी चाहिए। उन्होंने ग्लूकोमा के लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि यदि सामान्य सिरदर्द या आंखों में दर्द, पढ़ने वाली ऐनक का नंबर बार-बार बदलना, रोशनी के आसपास रंगीन घेरे दिखाई देना, आंखों में दर्द और लालिमा के साथ अचानक दृष्टि कम होना, दृष्टि के क्षेत्र का सीमित हो जाना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और आंखों का दबाव (प्रेशर) जांच करवाना चाहिए।
उन्होंने सावधानी बरतने पर जोर देते हुए कहा कि यदि आपके किसी रिश्तेदार को ग्लूकोमा है, यदि आपको शुगर, हाई ब्लड प्रेशर है, या आप दमा, एलर्जी तथा त्वचा रोगों के लिए स्टेरॉयड का उपयोग करते हैं, तो आपको ग्लूकोमा होने का खतरा हो सकता है। हर व्यक्ति को छह महीने बाद अपनी आंखों की जांच करवानी चाहिए और तेज धूप में चश्मे का उपयोग करना चाहिए।
देश से अंधापन दूर करने के लिए हमें आंखों की देखभाल के प्रति जागरूक होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि देश से अंधापन दूर करने के लिए समाजसेवी संस्थाएं स्वास्थ्य विभाग का पूरा सहयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अंधविश्वासों से बाहर निकलकर हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करनी चाहिए, क्योंकि इससे दो लोगों के जीवन में रोशनी आ सकती है।












