
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम के तत्वाधान में योग भवन डिगाना रोड में मनाया जा रहा चार दिवसीय योगेश्वर प्रभु रामलाल जन्मोत्सव समागम श्रद्धापूर्वक संपन्न हो गया। हवन और आरती के उपरांत श्री योग महादिव्य रामायण जी के पाठ का भोग डाला गया। इस उपरांत भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि सदगुरुदेव चमन लाल जी महाराज कहा करते थे कि गुरु अंधकार को दूर करते है। लेकिन गुरु भी योग्य होना चाहिए़। जिस प्रकार हम योग्य डॉक्टर के पास जाते है उसकी योग्यता हम जानते है।

अध्यापक भी योग्यता प्राप्त हम ढूंढते है। इसी प्रकार।गुरु में दो बाते होनी चाहिए।वह ईश्वर से युक्त होना चाहिए़। उस को भगवान से शक्ति आती है। वही शक्ति काम करती है। अगर गुरु माया से युक्त होगा तो वह हमारा नुकसान ही करेगा। गुरु के यम नियम परिपक्व होने चाहिए। उसमें अहिंसा तपस्या सच्चाई होनी चाहिए। ऐसे गुरु को देख कर शिष्य कुछ सीख सकता है। गुरु के आने से हमारे जीवन मे प्रकाश आएगा। जिस प्रकार सूरज के आने से अंधेरा दूर होता है। इसी तरह गुरु हमारे जीवन मे प्रकाश लाता है।शिष्य की गलतियों को ठीक करता है। गुरु रंगरेज की तरह हमारे जीवन को ईश्वर के रंग में रंगता है। हमें मोक्ष प्रदान करते है।
मुसीबत के समय भी गुरु हमारी रक्षा करते है। ज्ञान ईश्वर से अधिक गुरु देता है। ईश्वर तो सब के पास है। पर गुरु नहीं। गुरु हमारे मन को ठहराने के लिए एक स्वरूप।भी देता है। गुरु इक सहारा है। जंगलों मे साधु गुरुओं के सहारे ही तो रहते है। योग विहीन गुरु बुझे हुए दीपक के समान है। गुरु की पूजा करने से तमाम देवताओं की पूजा हो जाती है। गुरु के बिना किसी ने मुक्ति प्राप्त नहीं की। गुरु कुम्हार की तरह शिष्य को भक्ति में तपाता है बाहर से मांरता भी है तो अंदर से सहलाता है। ईश्वर काम क्रोध मोह लोभ अहंकार दे के भेजता है। गुरु हमें इन सब से बचाता है। जिनको योगी गुरु मिलते है वह धन्य है उनका जीवन सफल है। उन्होंने कहा कि हमें गुरु की शिक्षाओं का पालन करना चाहिए। भक्ति और पूजा के लिए जो समय निश्चित किया गया हो उससे कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए। हर रोज स्वाध्याय करना चाहिए। फोटो कैप्शन: हवन करते मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी तथा उपस्थित।












