Wednesday, November 4, 2026
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महाभारत में दर्ज अनेक उदाहरण हमें गौ माता के सम्मान एवं संरक्षण की प्रेरणा देते हैंः साध्वी वैष्णवी भारती

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रोशन ग्राउंड में करवाई जा रही श्रीमद् भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवे दिन में आशुतोष महाराज जी की शिष्या विश्व विख्यात भागवत भास्कर साध्वी वैष्णवी भारती ने भगवान की लीलाओं का वर्णन किया। धर्म की स्थापना के लिए कान्हा गोपाल भी बने। गोसेवा एवं गोपूजन कर हमें गाय का महत्व समझाया।

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महाभारत में दर्ज अनेक उदाहरण हमें गौ माता के सम्मान एवं संरक्षण की प्रेरणा देते हैं। विष्णुधर्मोत्तर पुराण में कहा गया है कि गाय की सेवा से आप तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं को प्रसन्न कर सकते हैं। गौ माता के पंचगव्य की बात करें तो उसमें गोमूत्र वैदिक काल से हमारे लिए लाभप्रद माना गया है। 400 से अधिक रोगों का उपचार इससे संभव है। प्राचीन भारत में किसान बीज भूमि में बोने से पहले धरती पर गोमूत्र छिड़ककर उसे शुद्ध करते थे। इसे गोमूत्र संस्कार कहा जाता था। गाय के दूध को सात्त्विक, मेधाशक्ति बढ़ाने वाला तथा अनेक रोगों को समाप्त करने वाला बताया गया है। गाय को ‘माँ’ उसकी आध्यात्मिकता एवं वैज्ञानिकता के कारण कहा गया है।

परंतु आज जिसे ‘माँ’ कहा जाता है, उसी का वध क्यों किया जा रहा है? मंगल पांडे जैसे अनेक वीरों ने जिस गाय की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दी, हमें उसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कदम उठाने होंगे। उन्होंने श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा चलाए जा रहे ‘कामधेनु परियोजना’ के विषय में भी बताया, जिसके अंतर्गत दिव्य ज्योति जागृति संस्थान भारतीय देसी नस्ल की गौ प्रजातियों के संवर्धन हेतु संकल्पित है। गौ नस्ल सुधार पर कार्य किया जा रहा है तथा जो दुर्लभ प्रजातियाँ समाप्त हो रही हैं, उन्हें संरक्षित किया जा रहा है। क्योंकि यदि गौ बचेगी तो देश प्रगति करेगा। गोवर्धन लीला के रहस्य को हमारे समक्ष बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। नंद बाबा एवं गाँव वालों द्वारा इंद्र यज्ञ की तैयारियाँ चलते देख भगवान श्रीकृष्ण उनसे प्रश्न करते हैं और उन्हें गोवर्धन पर्वत तथा धरती का पूजन करने हेतु प्रेरित करते हैं। प्रभु का भाव यह था कि जो धरती, वनस्पति और जल के माध्यम से हमारा पोषण कर रही है, उसकी वंदना और पूजा करनी चाहिए।

धरती का प्रतीक मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की गई। छप्पन भोग भगवान को अर्पित किए गए। इंद्र के अभिमान को ठेस लगी, तो उसने सात दिन तक मूसलाधार वर्षा कर गोकुलवासियों को परेशान करने का प्रयास किया, परंतु भगवान ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर सभी की रक्षा की। यदि आप भागवत महापुराण का अध्ययन करें तो ज्ञात होगा कि प्रभु ने नंद बाबा सहित ग्रामवासियों को कर्म के सिद्धांत का विवेचन किया। कर्म ही मनुष्य के सुख-दुःख, भय और क्षेम का कारण है। अपने कर्मों के अनुसार ही मनुष्य जन्म लेता है और मृत्यु को प्राप्त होता है। कर्म ही ईश्वर है। हम सभी नारायण के अंश हैं। हम कर्म को यश प्राप्ति के लिए नहीं करते, बल्कि कर्म की उपासना करते हैं। कर्म ही हमारी पूजा है। “कर से कर्म करो विधि नाना, चित्त रखो जहाँ दया निधाना।” यह दोहा सुनने में जितना सरल है, व्यवहारिक जीवन में उसे उतारना उतना ही कठिन है। यदि एक पूर्ण गुरु का सान्निध्य प्राप्त हो जाए, तो वे क्षण भर में ही हृदय में स्थित प्रभु का दर्शन करवा देते हैं। साथ ही श्वासों में चल रहे हरि के शाश्वत नाम को प्रकट भी करते हैं।

यद्यपि संसार में भगवान के अनेक नाम प्रचलित हैं, परंतु मोक्ष का मार्ग भीतरी नाम ही प्रशस्त करता है। कथा की शुरुआत मुख्य यजमान मनीष गुप्ता ( बिल्ला ब्रिक्स), कुशा गुप्ता,राहुल गुप्ता ,ओर दैनिक यजमान जगदीश अग्रवाल,उमेश गुप्ता,नित्य गुप्ता जी ने परिवार सहित भागवत पूजन कर की। कथा में विशेष रूप में दीपक बाली जी(Advisor to the Department of Tourism and Cultural Affairs, Government of Punjab), विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा,अविनाश राय खन्ना ( पूर्व सांसद),विजय सांपला( पूर्व चेयरमैन एसी कमीशन),सुरिंदर कुमार शिंदा ( मेयर),संतोष चौधरी, डा.सुनील कुमार चड्ढा( हिंदुजा ग्रुप),सुनील शेखावत( head manufacturing century plywood), अनूप शर्मा (प्लांट हेड),बी. एस. जसवाल( DGM ), उपेन्द्र त्रिपाठी,सुखविंदर सुक्खी(USA ),हरभजन सिंह,परमिंदर,रविंदर चीमा कानूनगो,पार्षद जसविंदर पाल,पूर्व पार्षद सुरिंदर कुमार बीटन,बजरंगी पाण्डेय,कुसुम पांडेय,अजीत सिंह (जे टी ओ bsnl), राकेश सूद,सौरव भागी,अशोक गगनदीप (प्रिंसिपल)
तरुण कुमार,अनुराग कालिया, डा. विजय धीर( वाइस चांसलर संत बाबा भाग सिंह यूनिवर्सिटी),पूजा बाली (deen sant Baba bhag singh University), गौतम मनोचा, कुलदीप सैनी,जसविंदर सैनी,राकेश भार्गव,जतिंदर सूद,संदीप अग्रवाल, अमनिंदर मिश्रा,अंजना कुमारी, और शहर की धार्मिक,राजनीतिक, सामाजिक संस्थाओं और शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे। अंत में ग्लोरियस वॉकर ग्रुप गौतम नगर,अरोड़ा महासभा,अशोक ,कुलदीप,रजत जी कथा व्यास को सम्मानित किया। स्वामी जी ने सभी से अपील की है अभी दो दिन शेष रह गए है जो लोग नहीं पहुंचे वो भी जरूर आए।

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