
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज), रिपोर्ट-नीरज धीमान। पंजाब के सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए सरकार ने 72 शिक्षकों और अधिकारियों के एक जत्थे को फिनलैंड भेजने का आदेश जारी किया है। 18 मई से 29 मई 2026 तक होने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए सूची तो जारी कर दी गई है, लेकिन इसमें जिलों की ‘समान भागीदारी’ को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। होशियारपुर की अनदेखी से रोषजारी की गई सूची में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि होशियारपुर जैसे बड़े और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी जिले से केवल 3 शिक्षकों (गुरप्रीत सिंह, मीनाक्षी और अशोक कुमार राजपूत) का चयन हुआ है। वहीं, इसके विपरीत पटियाला जिले का इस सूची में दबदबा है, जहाँ से 17 से अधिक शिक्षकों और अधिकारियों को फिनलैंड जाने का मौका मिला है।

अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनकसूची के अनुसार, कई जिलों की भागीदारी नाममात्र की है:होशियारपुर: केवल 3 चयन। मोगा और अमृतसर: क्रमशः केवल 1 और 2 चयन। पटियाला: सबसे अधिक 17+ चयन। बरनाला और मानसा: यहाँ से भी बहुत कम शिक्षकों को शामिल किया गया है। सवाल: क्यों नहीं दी जाती सभी जिलों को समान भागीदारी?शिक्षकों और जानकारों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब पूरे पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में सुधार का लक्ष्य है, तो चयन प्रक्रिया में सभी जिलों को एक समान अवसर क्यों नहीं दिया जाता?क्षेत्रीय असंतुलन: क्या फिनलैंड से मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय अनुभव केवल चुनिंदा जिलों के स्कूलों तक ही सीमित रहेगा? मानदंडों पर स्पष्टता का अभाव: होशियारपुर जैसे जिलों में भी काबिल शिक्षकों की कमी नहीं है, फिर भी वहां से इतनी कम संख्या में चयन होना चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
विकास में बाधा: यदि सभी जिलों के शिक्षकों को समान प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तो सीमावर्ती और पिछड़े जिलों के स्कूलों में नई तकनीकों का प्रसार कैसे होगा?मुख्य विवरण:
यह प्रशिक्षण यूनिवर्सिटी ऑफ तुर्कु, फिनलैंड में आयोजित होगा, जिसका पूरा खर्च पंजाब सरकार वहन करेगी। इन अधिकारियों को 16 मई की सुबह कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन जिलों के बीच इस बड़े अंतर ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है।











