
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। श्री आत्मानंद जैन सभा द्वारा संचालित एस ए वी जैन डे बोर्डिंग स्कूल में जैन शिक्षण निधि के प्रधान जीवन जैन के निर्देशानुसार एवं डीन सुनीता दुग्गल व प्रिंसिपल मनु वालिया की अध्यक्षता में मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित की गई। यह प्रतियोगिता स्कूल के पांचों हाउस के बीच करवाई गई जिसमें छठी से बाहरवीं कक्षा तक की छात्राओं ने बड़े उत्साह से भाग लिया और मेहंदी के बहुत ही आकर्षित डिजाइन बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस मौके पर स्कूल प्रधान जीवन जैन ने अपने भेजे गए संदेश में कहा कि मेहंदी लगाना एक प्राचीन भारतीय कला है। भारतीय संस्कृति और परंपरा का मेहंदी एक बहुत बड़ा हिस्सा है जो तीज, करवा चौथ और विवाह शादी के अवसरों पर विशेष रूप से और बड़े चाव के साथ लगाई जाती है। सेक्रेटरी मानिक जैन ने कहा कि मेहंदी आर्ट आज के समय में महत्वपूर्ण कला है।

मेंहदी जिसे हिना के नाम से भी जाना जाता है सकारात्मक भावनाओं से जुड़ी हुई है। कैशियर साहिल जैन ने कहा कि यह सिर्फ श्रृंगार का साधन नहीं बल्कि खुशियों का प्रतीक है।इसके बिना हर रीति रिवाज अधूरा माना जाता है।निकाले गए परिणाम संबंधी जानकारी देते हुए स्कूल डीन सुनीता दुग्गल और प्रिंसिपल मनु वालिया ने बताया कि कि छठी कक्षा में पहले स्थान पर जसनीत ,दूसरे स्थान पर मन्नत ,तीसरे स्थान पर छवि रही। सातवीं में पहले स्थान पर जन्नत,दूसरे स्थान पर यशिका और तीसरे स्थान पर अंजली रही। आठवीं कक्षा में पहले स्थान पर कृतिका ,दूसरे स्थान पर जसलीन और तीसरे स्थान पर जया रही। नौवीं कक्षा में पहले स्थान पर दिशा,दूसरे स्थान पर जसनूर और पारुल और तीसरे स्थान पर मोक्षिता रही। दसवीं कक्षा में पहले स्थान पर मन्नत, दूसरे स्थान पर दीक्षा और तीसरे स्थान पर नीलाक्षी रही। इसी प्रकार 11वीं कक्षा में कॉमर्स में पहले स्थान पर नीताशा,दूसरे स्थान पर समृद्धि और तीसरे स्थान पर अनविता रही। 11वीं साइंस में अंजली पहले स्थान पर,दूसरे स्थान पर डोनिया और तीसरे स्थान पर अदिति रही।12वीं कॉमर्स जसनीत और अवनी पहले स्थान पर और दूसरे स्थान पर सिया रही।12वीं आर्ट्स में सिमरन पहले स्थान पर,हरसिमरन दूसरे स्थान पर,तमन्ना तीसरे स्थान पर रही।इस प्रतियोगिता में रत्नाकर हाउस प्रथम स्थान पर इंद्र हाउस द्वितीय स्थान पर रहे। इस अवसर पर स्कूल प्रधान जीवन जैन सेक्रेटरी मानिक जैन और कैशियर साहिल जैन ने विजेता छात्राओं को मुबारकबाद दी।











