Tuesday, October 6, 2026
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दिव्य गुरु ही हैं जीव के शाश्वत पिता, जो ब्रह्मज्ञान द्वारा देते हैं जीवन को चेतना और साहस

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। होशियारपुर के गौतम नगर आश्रम में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा रविवार को एक विशाल साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। ‘फादर्स डे’ (पितृ दिवस) के विशेष अवसर पर आयोजित इस भक्तिमय कार्यक्रम में उपस्थित विशाल श्रद्धालु समाज को संबोधित करते हुए सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी रन्ने भारती ने आध्यात्मिक गुरु की महिमा और मानव जीवन में उनके पितृ-स्वरूप मार्गदर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक लौकिक पिता हमारे नश्वर शरीर का पालन-पोषण करता है और हमें सांसारिक सुख-सुविधाएं प्रदान करता है, परंतु एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु (सद्गुरु) हमारे जीवन के सच्चे और शाश्वत पिता होते हैं, जो हमारी आत्मा का पोषण करते हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टांतों का उल्लेख करते हुए साध्वी जी ने बताया कि जिस प्रकार महर्षि विश्वामित्र और गुरु वशिष्ठ ने प्रभु श्री राम को शैशवकाल से ही मार्गदर्शन देकर उनके भीतर अपार साहस, मर्यादा और चेतना का संचार किया था, उसी प्रकार एक पूर्ण सतगुरु शिष्य के जीवन को सर्वोच्च दिशा प्रदान करते हैं। जब भक्त प्रह्लाद को उनके भौतिक पिता हिरण्यकश्यप ने प्रताड़ित किया, तब परमपिता परमात्मा ने उनकी रक्षा की और उन्हें असीम साहस प्रदान किया। आज के युग में भी एक आदर्श गुरु, पिता के रूप में हमारा हाथ थामकर हमें जीवन के हर संघर्ष और अज्ञानता के गहन अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

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आज के आधुनिक समाज में जहां युवा वर्ग अवसाद, मानसिक तनाव और नशाखोरी जैसी गंभीर समस्याओं का तेजी से शिकार हो रहा है, वहां एक आध्यात्मिक पिता के मार्गदर्शन की नितांत आवश्यकता है। साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि जब तक मनुष्य को भीतर से आत्मिक जागृति नहीं मिलती, तब तक बाहरी बुराइयों का अंत संभव नहीं है। समाज में व्याप्त कन्या भ्रूण हत्या, पर्यावरण असंतुलन और मादक पदार्थों के सेवन जैसी कुरीतियों का मूल कारण केवल मानवीय चेतना का पतन है। इस पतन को केवल ब्रह्मज्ञान (ईश्वरीय ज्ञान) की दीक्षा के माध्यम से ही रोका जा सकता है। गुरु द्वारा प्राप्त ब्रह्मज्ञान से मनुष्य के भीतर सोई हुई चेतना जाग्रत होती है, जिससे उसे एक सफल, निडर और विवेकपूर्ण जीवन जीने की कला प्राप्त होती है। इसी रचनात्मक दिशा में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान अपने संस्थापक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के पावन मार्गदर्शन में बोध (नशा उन्मूलन कार्यक्रम), संतुलन (महिला सशक्तिकरण) और संरक्षण (पर्यावरण संरक्षण) जैसे विशेष प्रकल्प चला रहा है, जो समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव ला रहे हैं।

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