
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के दौरान मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने सतगुरु देव चमन लाल जी महाराज की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाराज श्री अक्सर कहा करते थे कि मानव जीवन मुक्ति के लिए प्राप्त हुआ है लेकिन हम मानव जन्म लेकर अपनी मनमानी करने लगते हैं यही से हमारा आवागमन शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्कूल में विद्यार्थियों की अलग-अलग कैटेगरी होती है इसी तरह भक्तों की भी अलग-अलग श्रेणी होती है। इनमें तीन श्रेणियां तामसिक राजसिक और सात्विक शामिल है। तामसिक श्रेणी वाला केवल भोग ही करता रहता है। वह कभी भी मुक्ति के लिए प्रयास नहीं करता। ऐसे व्यक्ति को मानव जन्म देकर विधना भी शायद पश्चाताप करती होगी कि उसने इसे मानव क्यों बना दिया। उन्होंने कहा कि मुक्ति के लिए कई बार कई कई जन्म लग जाते हैं। लेकिन जो रास्ता हम एक बार पकड़ लेते हैं इस पर अक्सर आगे बढ़ते हैं।

उन्होंने कहा कि तामसिक प्रवृत्ति वाले जानवर आदि की योनि को प्राप्त होते हैं। उनका अगला जन्म भी अपने कर्मों के अनुसार होता है। लेकिन कई बार सात्विक प्रवृत्ति वाला भी केवल अपने कर्मों के कारण सुखों को आनंद मान लेता है तथा इसी कारण उसे बार-बार जन्म लेना पड़ता है। अंतर केवल इतना है कि वह मुक्ति के रास्ते पर बढ़ने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि अगर हमने मुक्ति प्राप्त करनी है तो दुनिया की बातों की तरफ ध्यान नहीं देना होगा। हम कैसा पहरावा डालते हैं ,क्या कहते हैं क्या काम करते हैं दुनिया इसके बारे में चाहे जो भी कहे अगर हमारा रास्ता सही है तो फिर हमें विचलित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदगुरु देव चमन लाल जी महाराज का जीवन हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने हमें योगानुकूल जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा दी, भक्ति का रास्ता बताया और हमारे जीवन को शान्तिमय और सुखमय बनाया। इस मौके पर भक्तों ने प्रभु भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया।











