
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (25/11) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। यूनियन ने घोषणा की है कि 3 से 5 अगस्त तक पूरे प्रदेश में तीन दिवसीय चक्का जाम और पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री आवास और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना तथा पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर भूख हड़ताल भी की जाएगी। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूनियन के सूबा प्रधान रेशम सिंह गिल ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ अब तक करीब 70 बैठकें होने के बावजूद कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और ठेकेदारी प्रथा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया गया। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि ठेकेदारी व्यवस्था के कारण कर्मचारियों का आर्थिक शोषण हो रहा है। उनका दावा है कि ईपीएफ और ईएसआई के नाम पर करोड़ों रुपये की अनियमितताएं हुई हैं और संबंधित प्रमाण सरकार को सौंपे जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

यूनियन के सूबा महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों और वरिष्ठ उपप्रधान हरकेश कुमार विक्की ने आरोप लगाया कि सरकार ‘किलोमीटर स्कीम’ के जरिए परिवहन विभाग का निजीकरण कर रही है। उनका कहना है कि जानबूझकर पंजाब रोडवेज और पनबस की सैकड़ों बसों को स्पेयर पार्ट्स, टायर और बैटरियों की कमी का हवाला देकर खड़ा रखा गया है, जिससे निजी बस ऑपरेटरों को लाभ मिल रहा है। यूनियन का दावा है कि इस वजह से विभाग को प्रतिदिन करीब 1.5 लाख किलोमीटर परिचालन का नुकसान हो रहा है। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में लगभग 800 सरकारी बसें कंडम हो चुकी हैं, लेकिन नई बसों की खरीद नहीं की गई। साथ ही कई रूट निजी कंपनियों को दिए जा रहे हैं और टाइम-टेबल में भी अनियमितताएं की जा रही हैं।
यूनियन ने आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया। इसके तहत 27 जुलाई को पंजाब के सभी डिपो पर गेट रैलियां आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 3, 4 और 5 अगस्त को पूर्ण हड़ताल और चक्का जाम रहेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा। वहीं, विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर भूख हड़ताल भी की जाएगी। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगें नहीं मानीं और आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा। साथ ही सरकार की राजनीतिक रैलियों के बहिष्कार का भी ऐलान किया गया है।











