
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। देश में बच्चों को बीमारियों व मोटापे से बचाने के लिए ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने जंक फूड पर विशेष हेल्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अभी 4.1 करोड़ बच्चे ओवरवेट हैं। अनुमान है कि 2023 तक दुनिया के 11 प्रतिशत ओवरवेट बच्चे भारत में होंगे। इससे निपटने के लिए। ICMR ने 5 सूत्री प्लान जारी किया है। इसका सीधा असर FMCG और फूड कंपनियों पर पड़ेगा।

क्या-क्या बदलाव होंगे
- जंक फूड महंगा होगा: तंबाकू और शराब की तरह सिन टैक्स की तर्ज पर ज्यादा फैट, नमक और चीनी वाले सामान और शुगरी ड्रिंक्स पर टैक्स बढ़ेगा। इसका मकसद जंक फूड महंगा और हेल्दी खाना सस्ता करना।
- विज्ञापनों पर लगेगी रोक: कार्टून कैरेक्टर और भ्रामक हेल्दी टैग वाले विज्ञापनों पर सख्त पाबंदी। अनहेल्दी स्नैक्स को अब सेहतमंद बताकर नहीं बेचा जा सकेगा।
- पैकेट पर वार्निंग लेबल: हर पैकेट के आगे बड़े अक्षरों में शुगर, फैट और नमक की मात्रा लिखना जरूरी होगा। ताकि 2 सेकंड में पता चल जाए कि चीज सही है या नहीं।
- स्कूल कैंटीन का ऑडिट: स्कूलों और उनके आसपास जंक फूड बेचने पर रोक। स्कूल खुद अपने कैंटीन का हेल्थ स्कोर करेंगे।
- आयुष्मान भारत से जुड़ेगा: ये सारे कदम ‘आयुष्मान भारत – स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम’ के साथ जोड़े जाएंगे।
जागरूकता के लिए खास कॉमिक बुक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाए जाएंगे। इनमें बच्चों को मजेदार तरीके से बताया जाएगा कि स्नैक्स में कितना सोडियम और फैट होता है। UNICEF, WHO और FSSAI की साझेदारी वाले इस प्लान के लागू होने के बाद फूड कंपनियों को अपनी कीमत, पैकेजिंग और मार्केटिंग में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे।












