
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के ग्रीन स्कूल प्रोग्राम के तहत जेम्स कैम्ब्रिज स्कूल, होशियारपुर में जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) हरजिंदर कौर के नेतृत्व में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य स्कूलों में पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देना, अध्यापकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा विद्यालयों को पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक टिकाऊ बनाने संबंधी जानकारी और व्यावहारिक समझ प्रदान करना था। कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी हरजिंदर कौर, उप जिला शिक्षा अधिकारी अमनदीप शर्मा, प्रिंसिपल शैलेंद्र ठाकुर, प्रिंसिपल तरलोचन सिंह, प्रिंसिपल रमनदीप कौर तथा जिला नोडल अधिकारी अमनप्रीत सहोता विशेष रूप से उपस्थित रहे। जिले के विभिन्न स्कूलों से लगभग एक हजार अध्यापकों ने इसमें भाग लिया। इस अवसर पर प्रीति शर्मा और आरती राणा ने रिसोर्स पर्सन तथा अमनप्रीत सहोता ने मंच संचालक की भूमिका निभाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी हरजिंदर कौर ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानव समाज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। उन्होंने कहा कि स्कूल विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। ग्रीन स्कूल प्रोग्राम के माध्यम से विद्यालय अपने पर्यावरण का अध्ययन कर संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरणीय प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रीन स्कूल केवल पौधारोपण या स्वच्छता तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि यह विद्यालय के संपूर्ण पर्यावरण और संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन से जुड़ा व्यापक कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत जल संरक्षण, ऊर्जा की खपत, कचरा प्रबंधन, हरित क्षेत्र के विस्तार तथा जैव विविधता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवस्थित कार्य किया जाता है। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने अध्यापकों को ग्रीन स्कूल प्रोग्राम के उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, विद्यालयों में हरियाली बढ़ाने तथा जैव विविधता को संरक्षित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अध्यापकों को स्कूल स्तर पर ईको क्लबों को सक्रिय करने तथा विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियां आयोजित करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें यह भी बताया गया कि विद्यार्थियों को केवल पर्यावरण संबंधी जानकारी देने के बजाय उन्हें वास्तविक पर्यावरणीय समस्याओं की पहचान, आंकड़े एकत्र करने तथा उनके समाधान खोजने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं अध्यापकों ने विद्यालयों को पर्यावरण की दृष्टि से अधिक टिकाऊ, स्वच्छ, स्वस्थ एवं प्रकृति-अनुकूल बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।











