
अयोध्या (द स्टैलर न्यूज़)। अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन संभाल रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। इस पर कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी करते हुए सवाल उठाए और कहा कि भविष्य में ही पता चल पाएगा इसके नतीजे क्या होंगे। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला CEO बनाए जाने पर कांग्रेस नेता केवीपी रामचंद्र राव ने कहा, हमने देखा है कि पहले जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के साथ क्या हुआ। कल अगर उन्हें इसके पीछे कोई वास्तविक तथ्य मिलते हैं और वह इसे सामने लाते हैं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी हो जाए।

वहीं, कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा। पहले का ट्रस्ट भी प्रधानमंत्री की निगरानी में और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तहत नियुक्त किया गया था। लेकिन उसका क्या नतीजा निकला? तारिक अनवर ने कहा कि किसी न किसी व्यक्ति को नियुक्त किया जाना था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पहले से सावधानी बरती गई होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। उनके मुताबिक, राम मंदिर में चोरी की घटना हुई और इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं। भारतीय वायुसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जितेंद्र मिश्र को ट्रस्ट की शीर्ष कार्यकारी जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है, जब ट्रस्ट अपने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव कर रहा है। ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष समेत कई अन्य पदों पर भी बदलाव किए गए हैं और 3 नए ट्रस्टियों की नियुक्ति हुई है।
यह फैसला बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में लिया गया। प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय हुए हैं, जब दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद चल रहा है। ट्रस्ट ने नकद चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के उपायों पर भी चर्चा की है। ट्रस्ट की बैठक में नए प्रशासनिक ढांचे को लेकर कई अहम फैसले किए गए। महेश भगचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, स्वामी गोविंददेव गिरि अब महासचिव के पद पर नहीं रहेंगे। इसके अलावा महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडेय और डॉ. निर्मला यादव को तीन नए ट्रस्टी के तौर पर नियुक्त किया गया है। इन बदलावों के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज में पहली बार CEO का पद भी जोड़ा गया है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले अधिकारी हैं।












