
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब पुलिस के बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह हुंदल को मोहाली की अदालत में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। एएनटीएफ ने पूछताछ के लिए 10 दिन का रिमांड मांगा, लेकिन अदालत ने पांच दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया। एएनटीएफ ने कहा कि राजजीत सिंह से पांच लाख रुपये की रिकवरी करनी है। इस केस में पहले आरोपी बना एक डीएसपी सरकारी गवाह बन गया है। उसके बयानों को भी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने राजजीत सिंह को पटियाला से गिरफ्तार किया था। वह करीब तीन साल से फरार चल रहे थे।

अदालत में पेशी के बाद राजजीत सिंह के वकील सरबजोत सिंह ढिल्लों ने मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि राजजीत सिंह के खिलाफ एफआईआर नंबर 138 मई 2023 में दर्ज हुई थी। उसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 और एनडीपीएस एक्ट की धारा 59 लगाई है। वकील के अनुसार, एनडीपीएस एक्ट की धारा 59 में किसी अधिकारी द्वारा अपनी ड्यूटी का उचित तरीके से पालन न करने से संबंधित प्रावधान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस एफआईआर में किसी मादक पदार्थ की बरामदगी राजजीत सिंह से नहीं दिखाई गई है। उनके मुताबिक आरोप मुख्य रूप से अधिकारी की भूमिका और ड्यूटी से जुड़े हैं।
वकील ने यह भी दावा किया कि भ्रष्टाचार के इसी तरह के तथ्यों को लेकर 2019 में विजिलेंस ब्यूरो की ओर से जांच की गई थी और उसमें राजजीत सिंह को भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में निर्दोष पाया गया था। उनका तर्क है कि समान तथ्यों के आधार पर दोबारा कार्रवाई का सवाल उठता है। राजजीत सिंह के वकील ने यह भी दावा किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत जांच से पहले आवश्यक मंजूरी का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 59 से संबंधित कार्रवाई में भी आवश्यक स्वीकृति का सवाल है। इन बिंदुओं को बचाव पक्ष अदालत के समक्ष रखेगा। वहीं, पुलिस के मुताबिक राजजीत सिंह को पटियाला के दर्शन सिंह नगर स्थित मकान से गिरफ्तार किया गया। राजजीत सिंह के खिलाफ ड्रग मामलों में एनडीपीएस एक्ट समेत आईपीसी और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एएनटीएफ और विजिलेंस ब्यूरो ने भी केस दर्ज किए हैं। वह घोषित अपराधी (पीओ) भी घोषित किया जा चुका था।












