
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) की पीसीएस मुख्य परीक्षा के घोषित परिणाम में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के ‘बिना पैसे, बिना सिफारिश नौकरी’ देने के दावे पर सवाल उठाए हैं।

सुनील जाखड़ ने दावा किया की पीसीएस मुख्य परीक्षा के परिणाम में कुछ परीक्षा केंद्रों और कमरों से असामान्य संख्या में अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। उनके अनुसार, प्रत्येक परीक्षा कक्ष से 10 से 11 उम्मीदवार सफल हुए है, वहीं रोल नंबरों के क्रम में तीन से चार लगातार नंबर वाले अभ्यर्थियों के कुल 86 चयन हुए है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भगवंत मान सरकार के बिना सिफारिश और बिना रिश्वत नौकरियां देने के दावों के उलट, पीपीएससी मेन्स नतीजों के सामने आए आंकड़े सीधे सवाल खड़े करते है। सेंटर-7 के कमरा नंबर 8 से 24 में से 11 उम्मीदवार (45.8%) तथा सेंटर-11 और सेंटर-4 के कमरों से 10-10 उम्मीदवार (41.7%) शॉर्टलिस्ट हुए हैं। सिविल सेवा जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में एक ही कमरे से इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का पास होना महज एक संयोग नहीं हो सकता। जहां सेंटर-8 में कुल शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21% रही, वहीं सेंटर-1 के कमरा नंबर 1 से 7 तक यह दर महज 2.89% दर्ज की गई। एक ही परीक्षा में केंद्रों के बीच इतना बड़ा अंतर पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है। मंचों से मेरिट और पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब विशेष कमरों और खास सीरियल नंबरों से ही चयन निकलते हैं, तो यह मेहनती युवाओं के परिश्रम के साथ सीधा धोखा प्रतीत होता है। यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है, तो साक्षात्कार प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए, कॉपियों को सील किया जाए और पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच कराई जाए।











