Sunday, October 18, 2026
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वाह रे पुलिस विभाग: दूसरों को नसीहत, और खुद…


-दूसरों के चालान काटने वाली पुलिस खुद नियमों की पालना करना नहीं समझती जरुरी-
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। होशियारपुर पुलिस का हाल तो देखिए एक तरफ जहां अपराधिक मामलों को छोटा कहकर अनदेखा करने वाले पुलिस अधिकारी मजे से अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों की लापरवाही का लाभ उनके आधीन कर्मचारी भी खूब उठा रहे हैं। दूसरों को नियमों का पाठ पढऩे वाली टैफिक पुलिस खुद नियमों का कितना पालन करती है इसका उदाहरणें आए दिन देखने को मिलती रहती हैं, जब दूसरों द्वारा नियमों की उलंघना करने पर पुलिस द्वारा कार्रवाई को अमल में लाया जाता है तथा अपनी गल्ती होने पर ‘पीढ़ी थल्ले सोटा’ फेरना शायद वो भूल जाती है। नियमों की धज्जियां उड़ाती पुलिस को इन दिनों शहर में देखा जा सकता है। जहां कोई पुलिस मुलाजिम अपनी निजी गाडी को चौक पर लगाकर चालान काटने शुरु कर देता है तो कोई बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी को चौक पर लगाकर दूसरों को नियमों का पाठ पढ़ाते हुए सरकारी खजाने को भरने में जुट जाता है। परन्तु पुलिस को यह भी समझ लेना चाहिए कि आज की जनता खासकर युवा पूरी तरह से जागरुक हो चुके हैं तथा वे पुलिस की गलती को कैमरे में कैद करने से जरा भी संकोच नहीं करते। होशियारपुर के प्रभात चौक (महाराणा प्रताप चौक) पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा ट्रैफिक नियमों का उलंघन करने वालों के चालान काटे जा रहे थे। परन्तु चालान काटने वाले शायद यह भूल गए कि उनके करीब ही खड़ी एक गाड़ी जिसमें पुलिस की वर्दी सीट पर टंगी दिख रही है उस पर नंबर प्लेट ही नहीं है। ऐसे में इसे पुलिस की आम जनता पर दादागिरि समझा जा सकता है कि खुद नियमों का पालन न करके वे आम जनता को नियमों की दुहाई देकर उनके चालान पर चालान कैसे काट रही है।

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मुकेरियां के सेंट जोसफ कांनवैंट स्कूल में गत दिवस को हुआ वह किसी से छिपा नहीं है तथा पुलिस अधिकारी इसे मामलू घटना समझ कर अपना पल्ला छुड़ाते हुए शिकायत न मिलने का हवाला देते हुए कार्रवाई करने से बचते दिखे वहीं इस फोटो के वायरल होने से पुलिस के दोहरे मापदंडों की पोल खुलती नजर आ रही है कि किस प्रकार से जनता को नियमों की आड़ में तंग परेशान किया जा रहा है। एक युवक द्वारा यह फोटो खींच कर मीडिया को भेजी गई, जिसके बाद पुलिस की धक्केशाही और दोहरे मापदंडों की चर्चा शहर में जोरों पर है।
इतना ही नहीं टैफिक नियमों की पालना हेतु एक सप्ताह ट्रैफिक सप्ताह के तौर पर बनाने वाली पुलिस को वैसे भी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था से ज्यादा चालान काटने में रुची रहती है, इसके चलते लोग आम ही जाम से जूझते हैं।

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