
दातारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। प्रदूषण को लेकर सारी दुनिया चिंतित होने के बावजूद यही लगता है कि अभी प्रदूषण के स्तर को कम करने के ठोस प्रयास नहीं हो पा रहे हैं। दुनिया में केवल और केवल वायु प्रदूषण के कारण ही सालाना 33 लाख लोग मौत के आगोश में समा जाते हैं। आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश रंजन ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा इसमें भी सबसे बड़ा आंकड़ा आबादी के अत्यधिक दबाव वाले भारत और चीन का है। विकासशील देशों पर भी यह खतरा अधिक मंडरा रहा है। इस अवसर पर रंजन ने कहा दरअसल विद्युत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में तेजी से विकास वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनता जा रहा है।

एक समय था जब वायु प्रदूषण के लिए कल-कारखानों की धुआं उगलती गगनचुंबी चिमनियों को ही दोषी माना जाता था,लेकिन विकास की रफ्तार में वायु प्रदूषण के कई अन्य कारक भी उभरकर सामने आए हैं। शहरों में धुआं उगलती सडक़ें वायु प्रदूषण के कारण मौत का खास कारण बनती जा रही हैं। पंजाब सिंह ने कहा इसके अलावा बिजली की निर्बाधित आपूर्ति नहीं होने से बाजारों, मॉल्स व होटलों में जिस तरह से डीजल जेनरेटरों का उपयोग बढ़ता जा रहा है, वह भी वायु प्रदूषण का कारण बनता जारहा है। इस अवसर पर मुकेश ने कहा इसके अलावा घरों में अब इलेक्ट्रॉनिक आइटमों की भरमार है। एसी, फ्रिज आज आम हो गया है।
इनसे निकलने वाली गैस भी प्रदूषण का कारण बनती जा रही है। ऐसे में दुनिया के देशों को प्रदूषण का स्तर कम करने की ठोस कार्य योजना बनानी ही होगी। पानी की कमी के चलते इस तरह के पौधे लगाने होंगे जो कम पानी में भी पल-बढ़ सकें और प्रदूषण के स्तर को कम करने में सहायक हो सकें। उन्होंने कहा इसके लिए लोगों में समझ भी विकसित करनी होगी। वैज्ञानिकों को वैकल्पिक उपाय सुझाने होंगे। यह सब प्रयास समय रहते योजनाबद्ध तरीके से करने होंगे और आम आदमी का इसमें सहयोग विशेष तौर पर अभिलषित रहेगा, ताकि प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों और पर्यावरण पर उन्होंने कहा इस हेतु वन विभाग पूरी तरह जागरूक है और पूरे कंडी इलाका के जंगलों में खैर ,शीशम ,सागवान ,बांस ,बहेड़ा ,नीम ,आमला अर्जुन आदि के पेड़ लगाए जा रहे है क्यूंकि वनों से ही पर्यावरण संरक्ष्ण हो सकेगा। उन्होंने कहा पेड़ों की अवैध कटाई को रोकने के भी पूरे प्रयास करने होंगे तभी प्रर्यावरण संरक्षण हो सकता है और प्रदूषण भी नियंत्रित किया जा सकता हैधरती का वैभव वृक्ष देते हैं निशुल्क प्राणवायु आक्सीजन: मुकेश रंजन












